Kuwait में आज सुबह कई इलाकों में धमाकों की तेज़ आवाज़ें सुनी गईं, जिससे स्थानीय लोगों और प्रवासियों के बीच हलचल मच गई। हालांकि, कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने तुरंत इस पर सफाई देते हुए बताया कि यह कोई नया हमला नहीं है। यह असल में सेना द्वारा पिछले हमलों के खतरनाक अवशेषों को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए चलाया गया एक ऑपरेशन था।

धमाके कब हुए और इसके पीछे क्या कारण था?

कुवैती सेना के मुताबिक, रविवार 12 अप्रैल 2026 को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच एक फील्ड ऑपरेशन चलाया गया। इसमें Land Forces Engineering Corps की Explosive Ordnance Disposal (EOD) टीम शामिल थी। यह टीम पिछले हमलों के बाद बचे हुए विस्फोटक छर्रों और मलबे को निष्क्रिय कर रही थी, जिसकी वजह से धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं। अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त किया है कि यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षा मानकों के तहत की गई थी।

पिछले कुछ दिनों में कुवैत में क्या स्थितियां रहीं?

कुवैत पिछले कुछ समय से बाहरी हमलों और ड्रोन खतरों का सामना कर रहा है। रक्षा मंत्रालय और आंतरिक मंत्रालय की टीमें लगातार सक्रिय हैं ताकि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:

तारीख घटना/कार्रवाई
30 मार्च 2026 ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमले, एक भारतीय नागरिक की मौत हुई
6 अप्रैल 2026 EOD टीमों ने मलबे से जुड़ी 21 रिपोर्टों पर कार्रवाई की
7 अप्रैल 2026 17 शत्रुतापूर्ण ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया
10 अप्रैल 2026 7 ड्रोन रोके गए और नेशनल गार्ड की सुविधाओं को नुकसान पहुंचा
11 अप्रैल 2026 सड़कों पर लगभग 20 विस्फोटक खतरों को निष्क्रिय किया गया
12 अप्रैल 2026 सुबह 10 से 12 बजे तक विस्फोटक अवशेषों के निपटान का ऑपरेशन चला

आम लोगों और प्रवासियों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश

आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर नासिर बौसलाइब ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें। उन्होंने कहा कि किसी भी अज्ञात वस्तु या मलबे वाले क्षेत्र के पास न जाएं और वहां भीड़ जमा न करें। यदि कोई संदिग्ध वस्तु दिखती है, तो तुरंत आपातकालीन सेवाओं को सूचित करें। कुवैत में रह रहे भारतीय और अन्य प्रवासी अपनी सुरक्षा के लिए आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और ऑपरेशनल क्षेत्रों से दूर रहें।