कुवैत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) ने फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए कड़े नियम जारी किए हैं। यह फैसला डिलीवरी ऐप्स की मनमानी रोकने और बाजार में स्थिरता लाने के लिए लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स रेस्टोरेंट्स से अपनी मर्जी से कमीशन नहीं बढ़ा सकेंगे। मंत्रालय ने अगले तीन साल के लिए फीस और कमीशन को फिक्स करने का आदेश दिया है, जिससे छोटे दुकानदारों और आम जनता दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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क्या हैं नए नियम और निर्देश?

सरकार द्वारा जारी किए गए नए नियमों के मुताबिक, सभी डिलीवरी कंपनियों को अपनी फीस का पूरा ढांचा एक महीने के अंदर मंत्रालय को सौंपना होगा। जो रेट 2026 के लिए तय होंगे, वही अगले तीन साल तक लागू रहेंगे। इसके अलावा, डिलीवरी ऐप्स अब रेस्टोरेंट्स को सिर्फ अपने ही प्लेटफॉर्म पर रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

  • फीस फिक्सिंग: डिलीवरी ऐप्स द्वारा ली जाने वाली फीस और कमीशन 3 साल के लिए फिक्स कर दी गई है।
  • एक्स्क्लूसिविटी पर रोक: रेस्टोरेंट्स अब एक साथ कई डिलीवरी ऐप्स के साथ काम कर सकते हैं, कोई कंपनी उन्हें रोक नहीं सकती।
  • लाइसेंस में बदलाव: कंपनियों को दो महीने के अंदर अपने लाइसेंस में ‘डिलीवरी सेवाओं का प्रबंधन’ शामिल करना होगा।

ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा?

अक्सर देखा जाता है कि जो खाना रेस्टोरेंट में सस्ता मिलता है, वही डिलीवरी ऐप पर ऑर्डर करने पर महंगा हो जाता है। नए नियम के तहत अब ‘प्राइस पैरिटी’ (Price Parity) अनिवार्य कर दी गई है। इसका मतलब है कि डिलीवरी ऐप पर खाने के दाम और रेस्टोरेंट के अंदर के दाम बिल्कुल एक समान होने चाहिए।

इसके साथ ही, कंपनियों को ग्राहकों को बिल में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी और कोई भी छिपा हुआ चार्ज (Hidden Fee) नहीं लिया जा सकेगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अगर कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। रेस्टोरेंट्स को अब अपना बिक्री डेटा भी फ्री में मांगने का पूरा अधिकार होगा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.