कुवैत सरकार ने अपने नेशनल हेल्थकेयर प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नया डिक्री-कानून संख्या 50 (2026) जारी किया है, जिसके तहत हेल्थ एश्योरेंस हॉस्पिटल्स कंपनी (Dhaman) के मालिकाना हक को बदल दिया गया है। इस नए कानून के जरिए अब कंपनी के वो 50 प्रतिशत शेयर जो जनता की सदस्यता के लिए रखे गए थे, उन्हें सीधे कुवैत इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (KIA) को सौंप दिया गया है। इस कदम से सालों से अटके हुए स्वास्थ्य प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने का रास्ता साफ हो गया है।

इस नए कानून के मुख्य प्रावधान क्या हैं?

  • डिक्री-कानून संख्या 50 को 5 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर प्रकाशित किया गया है।
  • यह नया कानून 2010 के पुराने कानून में बदलाव करता है ताकि प्रोजेक्ट की रुकावटें दूर हो सकें।
  • KIA अब तय करेगा कि ये शेयर भविष्य में नागरिकों को किस अनुपात में दिए जाएंगे।
  • कुवैत इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और सोशल सिक्योरिटी संस्था (PIFSS) के पास पहले से 24 प्रतिशत शेयर मौजूद हैं।
  • इस बदलाव का मकसद कंपनी की कानूनी स्थिति को सुधारना और अस्पताल के कामकाज को तुरंत शुरू करना है।

प्रवासियों और भारतीयों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?

धामन अस्पतालों की स्थापना मुख्य रूप से कुवैत में रह रहे प्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए की गई थी। कुवैत में रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए यह प्रोजेक्ट बहुत अहम है क्योंकि इससे सरकारी अस्पतालों में भीड़ कम होगी। पहले दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रवासियों के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा की सालाना फीस 130 कुवैती दीनार तय की गई थी। अब जब सरकारी निवेश फंड ने इसकी कमान संभाली है, तो उम्मीद है कि प्रवासियों के लिए इलाज की प्रक्रिया जल्द और बेहतर तरीके से शुरू हो पाएगी। यह प्रोजेक्ट कुवैत विजन 2035 का एक हिस्सा है, जो पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए बनाया गया है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com