खाड़ी देशों (GCC) में लगभग 62 मिलियन लोग रहते हैं, जिनमें 35 मिलियन से ज्यादा विदेशी कामगार हैं। इन कामगारों को खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसी बीच कुवैत सरकार ने विदेशी कर्मचारियों के लिए कई नए नियम लागू किए हैं, जिनका सीधा असर वहां काम कर रहे 10 लाख से ज्यादा भारतीयों और अन्य प्रवासियों पर पड़ेगा। इसमें नौकरी छोड़ने से लेकर छुट्टी पर जाने और नए कॉन्ट्रैक्ट के नियम शामिल हैं।
कुवैत में नए लेबर नियम और छुट्टी का नया सिस्टम
कुवैत में अब निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए मल्टी-ट्रिप एग्जिट परमिट लागू कर दिया गया है। इससे पहले सिंगल-एग्जिट परमिट की व्यवस्था थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।
अब प्रवासी कर्मचारी Sahel या As’hal ऐप के जरिए आसानी से कई बार देश के बाहर यात्रा कर सकेंगे।
इसके साथ ही एक नया लेबर कॉन्ट्रैक्ट भी लागू हुआ है। इसमें नए कर्मचारियों के लिए 100 दिन का प्रोबेशन पीरियड अनिवार्य किया गया है। साथ ही प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए कम से कम 75 KWD प्रति माह की सैलरी तय की गई है।
कामगारों की अनुपस्थिति रिपोर्ट (Absence Reporting) पर नया आदेश
पब्लिक अथॉरिटी फॉर मैनपावर (PAM) ने As’hal पोर्टल के जरिए काम छोड़ने की सूचना सर्विस शुरू की है। यह उन कर्मचारियों के लिए है जो बिना बताए काम से गायब हो जाते हैं।
- अगर कोई कर्मचारी बिना सूचना के काम पर नहीं आता है, तो कंपनी डिजिटल तरीके से उसकी रिपोर्ट दर्ज करेगी।
- रिपोर्ट दर्ज होते ही कर्मचारी को Sahel ऐप पर तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
- अगर कर्मचारी को लगता है कि कंपनी ने गलत रिपोर्ट की है, तो वह 60 दिन के भीतर लेबर रिलेशंस डिपार्टमेंट में इसकी शिकायत कर सकता है।
- यह नोटिस गृह मंत्रालय (Ministry of Interior) में जमा करने के लिए 3 कार्य दिवसों तक मान्य रहेगा।
खाड़ी देशों में भारतीयों का दबदबा और सुरक्षा नियम
आंकड़ों के अनुसार, कुवैत की 4.8 मिलियन आबादी में करीब 2.16 मिलियन विदेशी कामगार हैं। इनमें सबसे ज्यादा 10 लाख कामगार भारत के हैं। इसके बाद मिस्र और बांग्लादेश का नंबर आता है।
PAM ने कामगारों की सुरक्षा के लिए एक नया निर्देश भी जारी किया है। इसके तहत अगर किसी भी वर्क साइट पर सायरन या खतरे की आधिकारिक चेतावनी सुनाई देती है, तो सभी कर्मचारियों को तुरंत काम रोकना होगा।
कुवैत के शासक शेख मिशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह ने स्पष्ट किया है कि विज़न 2035 के तहत स्थानीय लोगों को रोजगार देने की योजना के बावजूद विदेशी कामगार देश के विकास में एक अहम हिस्सा बने रहेंगे।
