कुवैत सरकार ने परिवार के नामों और सरनेम को लेकर एक नया कानून लागू किया है. अब लोग अपनी मर्जी से नाम के आगे ‘Al-‘ (अल) नहीं जोड़ पाएंगे. इसके लिए अब सख्त कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा और सरकार से मंजूरी लेनी होगी. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोई अपनी वंशावली या खानदान के नाम का गलत इस्तेमाल न कर सके.
नाम में ‘Al-‘ जोड़ने के लिए क्या नियम लागू हुए हैं?
कुवैत के न्याय मंत्री Nasser Al-Sumait ने बताया कि अब पिता या दादा के नाम के आगे ‘Al-‘ जोड़ना एक औपचारिक नाम संशोधन माना जाएगा. इसका मतलब है कि अब आप सीधे अपना नाम नहीं बदल सकते. इसके लिए एक खास कमेटी (Ancestry Claims Committee) से मंजूरी लेना जरूरी है और साथ में पुख्ता सरकारी दस्तावेज भी देने होंगे. हालांकि, आम बोलचाल या सामाजिक तौर पर ऐसे शब्दों के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है, लेकिन सरकारी कागजों में गलत जानकारी देना अब अपराध माना जाएगा.
किन हालातों में नाम बदलने की अनुमति मिलेगी?
सरकार ने कुछ खास शर्तें रखी हैं, जिनके आधार पर नाम बदलने की इजाजत दी जाएगी:
- अगर वह नाम पहले से ही राष्ट्रीयता के दस्तावेजों में दर्ज हो.
- अगर कोर्ट ने वंशावली या खानदान को लेकर कोई फैसला सुनाया हो.
- अगर किसी मान्यता प्राप्त परिवार के साथ वंशावली का संबंध साबित हो जाए.
- पुराने प्रशासनिक गलतियों या जालसाजी को सुधारने के लिए.
इन सब मामलों में अब DNA टेस्ट जैसी वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा ताकि सही पहचान सुनिश्चित हो सके.
नियम तोड़ने पर क्या सजा मिलेगी और कौन करेगा निगरानी?
इस नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारियों को गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है और सजा दी जा सकती है. इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी Ministry of Justice की होगी. इसके अलावा Public Prosecution, PACI और गृह मंत्रालय जैसे विभाग दस्तावेजों की जांच करेंगे ताकि रिकॉर्ड पूरी तरह सही रहें.