कुवैत सरकार ने नागरिकता से जुड़ी फाइलों में की गई गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए बेहद सख्त कदम उठाए हैं। नए कानून के तहत अब उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने गलत तरीके से अपनी या किसी और की नागरिकता फाइल में नाम जुड़वाया था। गृह मंत्रालय ने ऐसे लोगों को खुद सामने आकर जानकारी देने की सलाह दी है ताकि वे कानूनी कार्रवाई और सजा से बच सकें।

कुवैत के नए नागरिकता कानून में क्या बड़े बदलाव हुए हैं?

कुवैत सरकार ने 13 अप्रैल 2026 को Decree-Law No. (52) लागू किया था। इस नए कानून का मकसद नागरिकता प्रणाली को फिर से व्यवस्थित करना और फर्जीवाड़े को रोकना है। इस कानून की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • जांच का तरीका: आर्टिकल 20 के तहत अब नागरिकता की जांच के लिए डीएनए (DNA) टेस्ट और बायोमेट्रिक डेटा जैसे वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • अधिकार क्षेत्र: नागरिकता से जुड़े सभी अपराधों की जांच का पूरा अधिकार अब पब्लिक प्रॉसिक्यूशन (Public Prosecution) के पास होगा।
  • अपील का नियम: आर्टिकल 22 के मुताबिक, नागरिकता से जुड़े फैसले संप्रभुता के कार्य माने जाएंगे और इन्हें कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

गलत जानकारी देने या धोखाधड़ी करने पर क्या सजा मिलेगी?

सरकार ने नागरिकता फाइलों में हेराफेरी करने वालों के लिए कड़े जुर्माने और जेल की सजा तय की है। नियमों के अनुसार सजा इस प्रकार होगी:

  • गलत जानकारी देने पर: अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 3,000 कुवैती दीनार का जुर्माना भरना होगा।
  • जानबूझकर धोखाधड़ी करने पर: अगर मामला गंभीर धोखाधड़ी का पाया गया, तो सजा बढ़कर 7 साल की जेल और 5,000 कुवैती दीनार जुर्माना हो सकती है।
  • नागरिकता रद्द होना: आर्टिकल 14 के तहत, यदि किसी ने जानबूझकर किसी अपात्र व्यक्ति का नाम अपनी या किसी और की फाइल में जोड़ा है, तो उसकी अपनी नागरिकता भी रद्द की जा सकती है।

गृह मंत्रालय ने लोगों को क्या सलाह दी है?

First Deputy Prime Minister और Interior Minister शेख फहद अल-यूसुफ की अध्यक्षता वाली हायर कमेटी नागरिकता फाइलों की गहराई से जांच कर रही है। मंत्रालय ने उन लोगों से अपील की है जिन्होंने अपनी फाइलों में अवैध तरीके से नाम जुड़वाए हैं कि वे खुद General Directorate of Citizenship and Travel Documents के पास जाकर इसकी रिपोर्ट करें। अगर लोग स्वेच्छा से अपनी गलती मानते हैं, तो उन्हें कानूनी सजा से छूट दी जा सकती है। हालांकि, जो लोग इस मौके का फायदा नहीं उठाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनकी नागरिकता रद्द कर दी जाएगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कुवैत के नए नागरिकता कानून के तहत जांच के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल होगा?

कानून के आर्टिकल 20 के तहत जांच में साइंटिफिक तरीकों का इस्तेमाल होगा। इसमें डीएनए (DNA) टेस्ट और बायोमेट्रिक डेटा का उपयोग किया जाएगा ताकि नागरिकता की सच्चाई का पता लगाया जा सके।

क्या नागरिकता रद्द करने के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?

नहीं, आर्टिकल 22 के मुताबिक नागरिकता से जुड़े फैसले संप्रभुता के कार्य (acts of sovereignty) माने जाएंगे। इसलिए इन्हें किसी भी न्यायिक समीक्षा या कोर्ट के दायरे से बाहर रखा गया है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com