कुवैत में रहने वाले प्रवासियों के लिए रेजिडेंसी के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। सरकार ने नया कानून लागू किया है जिससे अब वीज़ा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इस कानून के तहत जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जिससे वहां रहने वाले लाखों प्रवासियों, खासकर भारतीयों पर सीधा असर पड़ेगा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के अंत तक रेजिडेंसी कानून तोड़ने वालों की कुल संख्या घटकर 80,800 रह गई है, जो 2024 में 81,500 थी। हालांकि, नए मामलों में बढ़ोतरी हुई है और 2025 में 11,700 नए मामले सामने आए। कुवैत की कुल आबादी अब 52.3 लाख पहुंच गई है, जिसमें करीब 70 प्रतिशत लोग गैर-कुवैती हैं। कुल वैध रेजिडेंसी परमिट की संख्या 31.66 लाख हो गई है।
लागू हुआ नया रेजिडेंसी कानून
अधिकारियों ने 5 जनवरी 2025 से नया रेजिडेंसी कानून (decree-in-law 114/2024) लागू कर दिया है। इस नए कानून का मकसद नियमों का सख्ती से पालन करवाना है। अगर कोई विदेशी पर्यटक अपने विजिट वीज़ा की समय सीमा खत्म होने के बाद भी तीन महीने से ज्यादा समय तक रुकता है और रेजिडेंसी परमिट नहीं लेता, तो उसे एक साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।
जुर्माने और पेनल्टी की पूरी लिस्ट
नए नियमों के तहत अलग-अलग उल्लंघन के लिए अलग-अलग जुर्माने तय किए गए हैं, जिन्हें नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:
| उल्लंघन का प्रकार | जुर्माना / सजा |
|---|---|
| विजिट वीज़ा ओवरस्टे (3 महीने से ज्यादा) | 1 साल तक जेल और 1,000 से 2,000 KD जुर्माना |
| वीज़ा वैधता खत्म होने पर | 10 KD प्रति दिन |
| एक्सपायर्ड रेजिडेंसी का रिन्यूअल न कराना | 2 KD प्रति दिन (अधिकतम 1,200 KD तक) |
| नवजात बच्चे की रेजिडेंसी में देरी | 2 से 4 KD प्रति दिन |
| डोमेस्टिक वर्कर की रेजिडेंसी देरी/इनकार | 2 KD प्रति दिन (अधिकतम 600 KD तक) |
| रेजिडेंसी ट्रैफिकिंग (अवैध व्यापार) | 3 से 5 साल जेल और 5,000 से 10,000 KD जुर्माना |
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
सरकार ने अब नवजात बच्चों की रेजिडेंसी दर्ज कराने की समय सीमा को बढ़ाकर जन्म से चार महीने कर दिया है। सामान्य रेजिडेंसी परमिट अब पांच साल तक के लिए दिए जा सकते हैं, जबकि कुवैती नागरिकों के बच्चों और रियल एस्टेट मालिकों को दस साल तक का परमिट मिल सकता है।
कुवैत में रहने वाले प्रवासियों में भारतीय समुदाय सबसे बड़ा समूह है। 2025 के अंत तक यहां लगभग 10.59 लाख भारतीय रह रहे थे। गैर-अरब एशियाई देशों के कुल प्रवासियों की संख्या करीब 20.3 लाख है।
