कुवैत सरकार ने प्रवासियों के लिए रेजिडेंसी और वीज़ा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. इन नए नियमों का मकसद देश की सुरक्षा और प्रवासियों के अधिकारों के बीच तालमेल बिठाना है. भारत सहित कई देशों से आए कामगारों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर इन बदलावों का सीधा असर पड़ेगा.

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रेजिडेंसी कानून में बड़ा बदलाव

दिसंबर 2024 में कुवैत ने एक नया विदेशी रेजिडेंसी कानून लागू किया. इस कानून ने 1959 के पुराने नियमों की जगह ली है. नए कानून के जरिए रेजिडेंसी परमिट, नौकरी और फैमिली स्पॉन्सरशिप की प्रक्रियाओं को पहले से ज़्यादा साफ़ और आधुनिक बनाया गया है ताकि निगरानी बेहतर हो सके.

लंबे समय के परमिट और नई सुविधाएं

23 दिसंबर 2025 से कुवैत में लंबी अवधि के रेजिडेंसी परमिट शुरू हुए. अब विदेशी निवेशकों को 15 साल तक और प्रॉपर्टी मालिकों व कुवैती महिलाओं के बच्चों को 10 साल तक का परमिट मिल सकेगा. हालांकि, पब्लिक सेक्टर में काम करने वाले प्रवासियों के लिए स्टैंडर्ड परमिट 5 साल का ही रहेगा. जनवरी 2026 से गृह मंत्रालय ने ई-सर्विसेज भी शुरू की हैं, जिससे अब रेजिडेंसी परमिट का रिन्यूअल या ट्रांसफर ऑनलाइन किया जा सकता है.

वीज़ा और रेजिडेंसी फीस में बढ़ोतरी

कुवैत सरकार ने जनवरी 2026 से वीज़ा और रेजिडेंसी फीस में बढ़ोतरी की है, जिसका विवरण नीचे दी गई टेबल में है:

परमिट/वीज़ा प्रकार नया शुल्क (KWD)
सालाना वीज़ा रिन्यूअल 20 KWD (पहले 10 था)
इन्वेस्टर्स और प्रॉपर्टी मालिक 50 KWD
सेल्फ-स्पॉन्सर्ड प्रवासी 500 KWD
विजिट वीज़ा 10 KWD प्रति महीना

विजिटर नियम और बायोमेट्रिक अनिवार्यता

विजिटर वीज़ा पर आने वालों के लिए रुकने की समय सीमा अब एक महीने से बढ़ाकर तीन महीने कर दी गई है. साथ ही, अब नागरिकों और प्रवासियों के लिए बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. अगर कोई व्यक्ति बायोमेट्रिक नहीं कराता है, तो उसकी ज़रूरी सरकारी सेवाएं रोक दी जाएंगी.

एग्जिट परमिट और मानवाधिकारों पर विवाद

जुलाई 2025 से प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले प्रवासियों के लिए एक नया नियम लागू हुआ. अब देश छोड़ने के लिए कर्मचारी को अपने मालिक (Employer) से पहले अनुमति लेनी होगी और गृह मंत्रालय के पोर्टल पर रिक्वेस्ट भेजनी होगी. ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस नियम की आलोचना की है. उनका कहना है कि इससे मज़दूर अपने मालिकों के कंट्रोल में ज़्यादा आ जाएंगे और उनके शोषण का खतरा बढ़ सकता है.

नागरिकता कानून में संशोधन

13 अप्रैल 2026 को सरकार ने नागरिकता कानून में बदलाव करते हुए Decree-Law No. (52) जारी किया. इस कानून का मकसद राष्ट्रीय पहचान को बनाए रखते हुए मानवीय और सामाजिक कारणों के बीच संतुलन बनाना है. इसमें यह साफ़ किया गया है कि कौन मूल रूप से कुवैती कहलाएगा और किन परिस्थितियों में नागरिकता वापस ली जा सकती है.

वीज़ा ट्रेडिंग पर सख्त कार्रवाई

नया कानून वीज़ा ट्रेडिंग यानी अवैध तरीके से वीज़ा बेचने वालों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान करता है. साथ ही यह नियम भी बनाया गया है कि विदेशी कामगार केवल उसी काम में तैनात होंगे जिसके लिए उन्हें भर्ती किया गया था.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.