कुवैत की सरकारी तेल कंपनी Kuwait Oil Company (KOC) ने एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को पाइपलाइन नेटवर्क के लिए 16 अरब डॉलर का एक बड़ा लीज समझौता किया है। इसे Project Peregrine नाम दिया गया है, जो कुवैत के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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समझौते की मुख्य बातें
इस डील के तहत कुवैत की सभी 13 पाइपलाइनों का उपयोग करने के अधिकार एक नई जॉइंट वेंचर कंपनी को दिए जाएंगे। यह पाइपलाइन नेटवर्क करीब 320 किलोमीटर लंबा है। इस समझौते की अवधि 20.5 साल तय की गई है। कुवैत ऑयल कंपनी इस नए जॉइंट वेंचर में 51% हिस्सेदारी अपने पास रखेगी, जबकि Blackstone, Brookfield, और KKR का ग्लोबल कंसोर्टियम बाकी की 49% हिस्सेदारी संभालेगा।
भारत और आम लोगों के लिए क्या असर है
आम आदमी और वहां काम करने वाले लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस डील से तेल उत्पादन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। कुवैत ऑयल कंपनी के पास पाइपलाइन का स्वामित्व और संचालन नियंत्रण बना रहेगा। कंपनी को इस समझौते से तुरंत 7.85 अरब डॉलर की राशि मिलेगी। इस फंड का इस्तेमाल कुवैत की तेल उत्पादन क्षमता को 2035 तक 40 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंचाने में किया जाएगा।
इस पूरे मामले की जानकारी कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) के सीईओ Shaikh Nawaf Saud Al-Sabah ने दी है। इस डील के लिए Centerview Partners, HSBC, और J.P. Morgan ने वित्तीय सलाह दी है। यह निवेश कुवैत के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है।
