कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) के सीईओ शेख नवाफ अल-सबाह ने तेल उत्पादन को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अगर क्षेत्र में चल रहा युद्ध तुरंत समाप्त हो जाता है, तो कुवैत अगले 3 से 4 महीनों के भीतर अपना तेल उत्पादन पूरी क्षमता के साथ फिर से शुरू कर देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में काफी अनिश्चितता बनी हुई है।

तेल उत्पादन और शिपिंग में अभी क्या दिक्कतें हैं?

कुवैत ने 7 मार्च 2026 से ही कच्चे तेल के उत्पादन और रिफाइनिंग में एहतियातन कटौती शुरू कर दी थी। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते सुरक्षित आवाजाही को लेकर दी गई धमकियों के बाद यह फैसला लिया गया था। इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, जो फिलहाल युद्ध के कारण बाधित है। स्टोरेज की कमी और शिपिंग के खतरों को देखते हुए कुवैत ने अपनी उत्पादन क्षमता को सीमित कर दिया था।

कुवैत के तेल उत्पादन से जुड़े कुछ मुख्य आंकड़े और जानकारी

  • उत्पादन स्तर: जनवरी 2026 में कुवैत लगभग 25.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन कर रहा था।
  • प्रारंभिक कटौती: क्षेत्रीय संघर्ष की वजह से करीब 1 लाख बैरल प्रतिदिन की शुरुआती कटौती की गई थी।
  • फोर्स मेज्योर (Force Majeure): शिपिंग सुरक्षा को देखते हुए KPC ने 7 मार्च 2026 को फोर्स मेज्योर की घोषणा कर दी थी।
  • समय सीमा: युद्ध खत्म होने के 120 दिनों के भीतर उत्पादन फिर से सामान्य स्तर पर आ सकता है।
  • प्रभाव: इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।

प्रवासियों और वैश्विक बाजार पर इसका क्या असर होगा?

कुवैत में काम करने वाले प्रवासियों और खासतौर पर तेल क्षेत्र से जुड़े भारतीय कामगारों के लिए यह खबर काफी अहम है। तेल उत्पादन कम होने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है, लेकिन शेख नवाफ अल-सबाह के इस बयान से उम्मीद जागी है कि हालात सुधरते ही काम तेजी से पटरी पर लौट आएगा। कुवैत सरकार का लक्ष्य है कि जैसे ही समुद्री मार्ग सुरक्षित होंगे, तेल की सप्लाई को फिर से पुराने स्तर पर ले जाया जाए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.