Kuwait में वर्कर्स के जमावड़े पर बड़ी कार्रवाई, मानव तस्करी के शक में मामला CID को सौंपा, PAM ने शुरू की जांच
कुवैत के Public Authority for Manpower (PAM) ने अपने मुख्यालय के बाहर इकट्ठा हुए मज़दूरों के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस जमावड़े को देखते हुए विभाग ने मानव तस्करी (human trafficking) के संदेह में मामले की जांच शुरू कर दी है। इस पूरे केस को अब Criminal Investigation Department (CID) को सौंप दिया गया है ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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कुवैत में आखिर क्यों इकट्ठा हुए वर्कर्स और क्या है पूरा मामला?
22 अप्रैल 2026 को PAM के ऑफिस के बाहर बड़ी संख्या में मज़दूर इकट्ठा हुए थे। शुरुआती तौर पर यह मामला नौकरी की शर्तों और स्पॉन्सरशिप से जुड़ी समस्याओं का लग रहा था। इससे पहले 13 अप्रैल को भी दो अलग-अलग दिनों में करीब 400 और 300 वर्कर्स जमा हुए थे। उन मामलों में भी कंपनी मालिकों और अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
मानव तस्करी के शक में क्या होगी अब कार्रवाई?
कुवैत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इसे CID को भेज दिया है। कुवैत का कानून नंबर 91 (2013) मानव तस्करी और प्रवासियों की तस्करी को रोकने के लिए बनाया गया है। PAM ने साफ किया है कि वे मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा करेंगे और गलत काम करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे। प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी शिकायतों के लिए आधिकारिक रास्तों का इस्तेमाल करें और काम बंद न करें।
कुवैत में रहने वाले भारतीय और प्रवासियों पर क्या होगा असर?
कुवैत में काम करने वाले भारतीय भाइयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर ज़रूरी है। सरकार अब कॉन्ट्रैक्ट और लेबर कानूनों का पालन करने पर ज़्यादा ज़ोर दे रही है। अगर किसी भी वर्कर को अपनी सैलरी या स्पॉन्सरशिप में दिक्कत आती है, तो वे सीधे PAM के पास जा सकते हैं। सड़कों पर जमावड़ा करने के बजाय आधिकारिक शिकायत करना ज़्यादा सुरक्षित और सही तरीका है ताकि किसी भी कानूनी पचड़े से बचा जा सके।