कुवैत सरकार इन दिनों मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों को लागू करने में जुटी है. इसी सिलसिले में 21 मई 2026 को प्रधानमंत्री शेख अहमद अल-अब्दुल्ला ने एक अहम बैठक की. इस बैठक का मुख्य मकसद FATF की शर्तों को पूरा करना और देश को ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकालना है.
कुवैत सरकार पर FATF का क्या दबाव है और ग्रे लिस्ट क्या है?
Financial Action Task Force (FATF) ने फरवरी 2026 में कुवैत को अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया था. इसका मतलब है कि अब कुवैत उन देशों की सूची में है जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. FATF ने पाया कि कुवैत में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामलों में सजा देने और कार्रवाई करने की रफ़्तार कम है. साथ ही, हाई रिस्क सेक्टर की निगरानी भी ठीक नहीं थी.
अब कुवैत सरकार अपनी नेशनल फ्रेमवर्क को मजबूत कर रही है ताकि वित्तीय पारदर्शिता बढ़ सके. सरकार का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कमियों को दूर करना है ताकि देश इस निगरानी सूची से बाहर आ सके.
पीएम की बैठक में किन बड़े अधिकारियों ने लिया हिस्सा?
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री शेख अहमद अल-अब्दुल्ला के साथ कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद थे. बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि सरकारी विभागों के बीच तालमेल कैसे बढ़ाया जाए ताकि नियमों का पालन सही तरीके से हो सके. बैठक में शामिल मुख्य लोगों की जानकारी नीचे टेबल में दी गई है:
| पद/विभाग | नाम |
|---|---|
| प्रधानमंत्री | शेख अहमद अल-अब्दुल्ला |
| न्याय मंत्री | नासिर अल-सुमैत |
| वाणिज्य और उद्योग मंत्री | ओसामा बूदई |
| विदेश मंत्री | शेख जर्राह अल-जाबर |
| सेंट्रल बैंक गवर्नर | बासेल अल-हारून |
| FIU प्रमुख | डॉ. हमद अल-मकराद |
सरकार ने यह साफ़ किया है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है. इससे पहले 30 अप्रैल और 3 मई 2026 को भी इसी मुद्दे पर हाई लेवल मीटिंग्स की गई थीं.
Frequently Asked Questions (FAQs)
FATF ग्रे लिस्ट का क्या मतलब है?
यह उन देशों की लिस्ट है जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक निगरानी रखी जाती है क्योंकि वहां मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग रोकने के नियम कमजोर होते हैं.
कुवैत को ग्रे लिस्ट में क्यों डाला गया?
कुवैत में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में कानूनी कार्रवाई की कमी और हाई रिस्क सेक्टर की ठीक से निगरानी न होने की वजह से उसे फरवरी 2026 में ग्रे लिस्ट में रखा गया था.
