लाल सागर में समुद्री रास्तों पर मंडरा रहे खतरों के बीच Kuwait ने Saudi Arabia के साथ मजबूती से खड़े होने का ऐलान किया है। Kuwait Ministry of Foreign Affairs ने 21 जुलाई 2026 को जारी एक बयान में हौथी आंदोलन द्वारा दी गई धमकियों की कड़ी निंदा की है। हौथी गुट ने 20 जुलाई 2026 को सऊदी अरब पर समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था, जिसे कुवैत ने पूरी तरह से आधारहीन बताया है।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंता
कुवैत ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से United Nations Security Council के प्रस्तावों, खासकर 2216 और 2722 को सख्ती से लागू करने की अपील की है। कुवैत के अनुसार, 1982 के समुद्री कानून के तहत हर देश को सुरक्षित नौवहन का अधिकार है। वहीं, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी साफ कर दिया है कि वे अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाएंगे। Major General Turki Al-Maliki ने इन हमलों को समुद्री डकैती के समान बताया है।
तनाव का असर और मौजूदा स्थिति
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच 21 जुलाई 2026 को हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कुवैत ऑयल टैंकर कंपनी के जहाज Kaifan पर एक अज्ञात गोले से हमला हुआ। इस घटना ने सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। United Nations के प्रवक्ता Stephane Dujarric ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और बातचीत का रास्ता चुनने की अपील की है। Hans Grundberg, जो यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैं, वर्तमान में 2022 के संघर्ष विराम समझौते को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। कुवैत और कतर ने स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब की सुरक्षा ही पूरे Gulf Cooperation Council देशों की सुरक्षा है।
