कुवैत ने शरणार्थियों और विस्थापित लोगों की मदद के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। 28 जून 2026 को वर्ल्ड रिफ्यूजी डे के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह ऐलान किया गया। दुनिया भर में युद्ध और संघर्ष के कारण विस्थापित लोगों की संख्या 12 करोड़ के पार पहुँच गई है, जिसे देखते हुए कुवैत ने UNHCR के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को और मज़बूत करने का फैसला किया है।

इस मौके पर असिस्टेंट फॉरेन मिनिस्टर Sadeq Marafi ने कहा कि कुवैत पिछले 30 सालों से UNHCR के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि विस्थापितों की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कोशिशें तेज़ की जाएं और अपने वादों को पूरा किया जाए। उन्होंने कुवैती चैरिटी और Zain Group जैसी निजी कंपनियों के योगदान की भी तारीफ की।

UNHCR की प्रतिनिधि Nisreen Rabian ने चेतावनी दी कि विस्थापित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मदद में बड़ी कटौती हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में एकजुटता बहुत ज़रूरी है ताकि शरणार्थियों की गरिमा बनी रहे और उन्हें अपना जीवन दोबारा शुरू करने का मौका मिले।

विदेश मंत्री Abdullah Al-Yahya ने बताया कि कुवैत उत्तरी इराक में 2 लाख से ज़्यादा और जॉर्डन में 1 लाख से ज़्यादा शरणार्थियों को स्वास्थ्य और अन्य ज़रूरी सेवाएँ दे रहा है। वहीं, डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर शेख Jarrah Jaber Al-Ahmad Al-Sabah ने भी इन प्रयासों को और बढ़ाने पर ज़ोर दिया ताकि विस्थापित समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।

UNHCR कमिश्नर Filippo Grandi ने नवंबर 2025 में कुवैत का दौरा किया था। उस दौरान Kuwait Fund for Arab Economic Development (KFAED) के ज़रिए सूडान और चाड में विस्थापितों की मदद के लिए 57 लाख डॉलर के दो समझौते साइन किए गए थे। इस राशि का इस्तेमाल शिक्षा, पानी, स्वास्थ्य और रहने की जगह मुहैया कराने के लिए किया जाएगा।

साल 2026 के वर्ल्ड रिफ्यूजी डे की थीम “Until Everyone is Safe” रखी गई थी। जून 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 सालों में पहली बार विस्थापितों की संख्या में गिरावट देखी गई है और 2025 में करीब 1.47 करोड़ लोग अपने मूल देशों या इलाकों में वापस लौटे हैं। साथ ही, UNHCR और Zain Group ने अपनी 10 साल की साझेदारी का जश्न मनाया, जिसके तहत MENA क्षेत्र में 11,000 से ज़्यादा लोगों को नकद सहायता पहुँचाई गई है।