कुवैत की प्रमुख तेल रिफाइनरियों पर हुए ड्रोन हमलों ने पूरी दुनिया में हवाई ईंधन (Jet Fuel) का बड़ा संकट पैदा कर दिया है। मार्च के महीने में हुए इन हमलों के बाद से मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्ला रिफाइनरियों में कामकाज काफी प्रभावित हुआ है। इस स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरलाइंस को फ्यूल मिलने में भारी दिक्कत हो रही है जिससे भविष्य में उड़ानों के रद्द होने और यात्रियों के लिए किराये में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।

कुवैत की रिफाइनरियों पर कब और कैसे हुए हमले?

कुवैत की दो सबसे बड़ी रिफाइनरियों, मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्ला को मार्च 2026 में निशाना बनाया गया था। इन हमलों से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:

  • 19 मार्च 2026: दोनों रिफाइनरियों की ऑपरेशनल यूनिट्स पर ड्रोन से हमला किया गया जिससे आग लग गई थी।
  • 20 मार्च 2026: मीना अल-अहमदी पर दोबारा हमला हुआ जिसमें कई यूनिट्स में आग लगी, हालांकि किसी की जान नहीं गई।
  • 24 मार्च 2026: हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावट के कारण दुनिया का 10% जेट फ्यूल सप्लाई रुक गया है।
  • कुवैत की सेना ने जानकारी दी है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है।

दुनियाभर की एयरलाइंस और आम यात्रियों पर क्या असर होगा?

इस संकट का सीधा असर आम लोगों के हवाई सफर और एयरलाइन कंपनियों के खर्च पर पड़ रहा है। जेट फ्यूल की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के शेड्यूल बिगड़ रहे हैं। इसकी वर्तमान स्थिति को इस तालिका से समझा जा सकता है:

देश/कंपनी प्रभाव की स्थिति
वियतनाम एयरलाइंस 1 अप्रैल से करीब 24 घरेलू उड़ानें बंद करने की तैयारी है।
ऑस्ट्रेलिया कई पेट्रोल पंपों पर तेल और डीजल का स्टॉक खत्म हो रहा है।
IATA इसे अब तक की सबसे बड़ी सप्लाई चुनौतियों में से एक बताया है।
Air France-KLM सप्लाई कम होने पर उड़ानों को रोकने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
ईंधन की कीमत 17 मार्च तक फ्यूल की कीमत 202 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी।

खाड़ी देशों से भारत आने वाले प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि एयरलाइंस कंपनियां फ्यूल की कमी के कारण टिकटों के दाम बढ़ा सकती हैं या कुछ रूटों पर फ्लाइट्स कम कर सकती हैं।

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) का आधिकारिक बयान

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने बताया है कि हमलों के बाद एहतियात के तौर पर कुछ यूनिट्स को बंद किया गया था ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कंपनी ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू कर दिया है क्योंकि होर्मुज के रास्ते तेल का परिवहन अब कठिन हो गया है। समुद्री जानकारी देने वाली कंपनी Windward के अनुसार, करीब 73 बड़े फ्यूल टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं और लोडिंग का काम कई दिनों से रुका हुआ है। जापान ने भी इस कमी को देखते हुए अपने राष्ट्रीय तेल भंडार से तेल निकालने का फैसला किया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.