ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने का फैसला किया है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई है. कुवैत ने इस कदम का सख्त विरोध किया है और इसे पूरी तरह गलत बताया है. इस विवाद की वजह से तेल की सप्लाई और समुद्री रास्तों पर बड़ा असर पड़ा है, जिसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट और गल्फ देशों में काम करने वाले प्रवासियों के व्यापार पर भी पड़ सकता है.

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कुवैत और GCC देशों ने ईरान के फैसले को क्यों नकारा?

कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) ने 29 अप्रैल 2026 को खबर दी कि कुवैत ने ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद करने के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है. इससे पहले 28 अप्रैल को जेद्दा में GCC देशों की 19वीं बैठक हुई थी. इस बैठक में कुवैत समेत सभी सदस्य देशों ने ईरान की इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताया और कहा कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.

  • GCC नेताओं ने साफ किया कि समुद्री रास्तों की आजादी से कोई समझौता नहीं होगा.
  • संयुक्त रक्षा समझौते के तहत यह तय हुआ कि किसी एक सदस्य देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा.
  • देशों ने UN चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत अपनी रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के अधिकार को दोहराया.

अंतरराष्ट्रीय कानून और ईरान का क्या दावा है?

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के मुताबिक, Strait of Hormuz एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है जिसे कोई भी देश बंद नहीं कर सकता और न ही इस पर कोई ट्रांजिट फीस लगा सकता है. UN चीफ एंटोनियो गुटेरेस और IMO चीफ आर्सेनियो डोमिंगुएज ने भी मांग की है कि इस रास्ते को बिना किसी भेदभाव के तुरंत खोला जाए.

दूसरी तरफ, ईरान का कहना है कि वह UNCLOS संधि का हिस्सा नहीं है, इसलिए वह इस कानून से बंधा नहीं है. ईरान ने दावा किया है कि उसे अमेरिका, इसराइल और उनके साथियों से जुड़े जहाजों को रोकने का पूरा हक है. ईरान के नेवी कमांडर शाहराम ईरानी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना आगे बढ़ती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

तेल की सप्लाई और शिपिंग पर क्या असर पड़ा है?

इस तनाव की वजह से समुद्री ट्रैफिक अब पहले के मुकाबले सिर्फ 5 प्रतिशत रह गया है, जिससे दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है. अमेरिका ने भी 13 अप्रैल 2026 को ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी थी ताकि ईरान को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा सके.

तारीख महत्वपूर्ण घटना
7 अप्रैल 2026 UN सिक्योरिटी काउंसिल के प्रस्ताव को चीन और रूस ने वीटो किया.
13 अप्रैल 2026 अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू की.
20-21 अप्रैल 2026 कुवैत ने तेल शिपमेंट पर ‘फोर्स मेज्योर’ (force majeure) लागू किया.
28 अप्रैल 2026 GCC देशों ने जेद्दा बैठक में ईरान के कदमों को गैरकानूनी बताया.
29 अप्रैल 2026 ईरान ने अरब सागर की ओर से रास्ता बंद करने का ऐलान किया.

Frequently Asked Questions (FAQs)

Strait of Hormuz बंद होने से क्या असर होगा?

इस रास्ते के बंद होने से ग्लोबल तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है और शिपिंग ट्रैफिक गिरकर 5% रह गया है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है.

कुवैत ने ‘फोर्स मेज्योर’ क्यों घोषित किया?

रास्ता बंद होने की वजह से कुवैत के लिए अपने तेल शिपमेंट के कॉन्ट्रैक्ट पूरे करना नामुमकिन हो गया था, इसलिए 20-21 अप्रैल को यह कदम उठाया गया.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com