कुवैत सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए 1,266 लोगों की नागरिकता वापस ले ली है। सरकार ने इसके लिए छह अलग-अलग फरमान जारी किए हैं, जिनमें उन लोगों के परिवार भी शामिल हैं जिन्होंने दूसरों के जरिए नागरिकता पाई थी। यह पूरी कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई है जिन्होंने गलत तरीके से या फर्जी दस्तावेजों के जरिए कुवैती नागरिकता हासिल की थी।

नागरिकता क्यों छीनी गई और कौन से नियम लागू हुए?

कुवैत सरकार ने यह फैसला नागरिकता कानून के आर्टिकल 21 bis (A) के तहत लिया है। मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाया गया है जिन्होंने फर्जी कागजात के जरिए नागरिकता ली थी। इसके अलावा, आर्टिकल 10 और 11 का भी इस्तेमाल किया गया है। आर्टिकल 10 उन लोगों के लिए है जिन्होंने गलत जानकारी दी, जबकि आर्टिकल 11 के तहत दोहरी नागरिकता रखने वालों या देश के खिलाफ काम करने वालों की नागरिकता खत्म की जा सकती है।

कितने लोगों पर हुई कार्रवाई और कौन शामिल हैं?

इस कार्रवाई के तहत अलग-अलग डिक्री जारी किए गए हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:

  • डिक्री नंबर 60: इसमें सबसे ज्यादा 1,242 लोगों और उनके परिवार की नागरिकता खत्म की गई।
  • डिक्री नंबर 65: इसमें 20 लोगों की नागरिकता छीनी गई, जिनमें नेशनल असेंबली का एक पूर्व सदस्य भी शामिल है।
  • अन्य डिक्री: डिक्री नंबर 61, 62, 66 और 67 के तहत कुछ अन्य व्यक्तियों और उनके परिजनों पर कार्रवाई की गई है।

सरकार का क्या कहना है और यह फैसला क्यों लिया गया?

इंटीरियर मिनिस्ट्री (Ministry of Interior) के अधिकारियों ने बताया कि यह सब राष्ट्रीय पहचान को बचाने और नागरिकता के नियमों का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए किया गया है। प्रथम उप प्रधानमंत्री और आंतरिक मंत्री शेख फहद यूसुफ सऊद अल-सबाह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इन मामलों की जांच की और सिफारिशें दीं। सरकार ने साफ किया है कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के मुताबिक की गई है और प्रभावित लोग कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।