कुवैत सरकार ने नागरिकता को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। देश के 36 लोगों की नागरिकता रद्द कर दी गई है क्योंकि उनके पास दो देशों की नागरिकता थी। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह फर्जी तरीके से या नियमों के खिलाफ नागरिकता लेने वालों को बख्शने वाली नहीं है।

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नागरिकता क्यों छीनी गई और कौन सा नियम लागू हुआ?

सुप्रीम कमेटी फॉर कुवैती सिटीजनशिप इन्वेस्टिगेशन ने यह फैसला सुनाया। नियम के मुताबिक, अगर कोई कुवैती नागरिक अपनी मर्जी से किसी दूसरे देश की नागरिकता लेता है, तो वह अपनी कुवैती नागरिकता खो देगा। यह पूरी कार्रवाई अमीरी डिक्री नंबर 15 (1959) के आर्टिकल 11 के तहत की गई है।

हाल ही में हुए अन्य बड़े बदलाव और कार्रवाई क्या हैं?

सिर्फ 36 लोग ही नहीं, बल्कि 21 अप्रैल को कुल 172 लोगों की नागरिकता वापस ली गई। इनमें 166 लोग दो पासपोर्ट रखने वाले थे और 6 महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने विदेशी नागरिक से शादी कर वहां की नागरिकता ली थी। अब नए नियमों के तहत, प्राकृतिक रूप से नागरिकता पाने वालों को 3 महीने के भीतर अपनी पुरानी नागरिकता छोड़नी होगी, वरना उनकी कुवैत की नागरिकता रद्द हो जाएगी।

इस पूरी कार्रवाई के पीछे सरकार का क्या मकसद है?

यह पूरा अभियान अमीर शेख मिशाल अल-अहमद अल-जाबर अल-सबाह के नेतृत्व में चल रहा है। सरकार का कहना है कि वह कुवैत की नागरिकता की शुद्धता को बनाए रखना चाहती है। अब धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर नागरिकता लेने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और कुछ खास हालातों में परिवार के सदस्यों की नागरिकता भी छीनी जा सकती है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.