कुवैत की सुप्रीम कमिटी फॉर नेशनैलिटी इन्वेस्टिगेशन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति और उसके 20 आश्रितों की नागरिकता रद्द कर दी है। जांच में सामने आया कि यह व्यक्ति पिछले 39 साल से एक मृत कुवैती नागरिक की पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। इस धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।

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कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज

जांच में पता चला कि आरोपी ने उस व्यक्ति की पहचान चुराई थी, जिसकी मौत 26 अप्रैल 1970 को 30 साल की उम्र में हो गई थी। 1987 में आरोपी ने उस मृत व्यक्ति के नाम पर अपना सिविल नंबर हासिल कर लिया था। उस समय कुवैत के सरकारी विभागों जैसे नेचुरललाइजेशन एडमिनिस्ट्रेशन और बर्थ्स एंड डेथ्स एडमिनिस्ट्रेशन के बीच डेटा लिंक नहीं होने का फायदा उठाकर उसने यह फर्जीवाड़ा किया।

असली पहचान और सबूत

अधिकारियों ने पाया कि आरोपी की असली पहचान किसी दूसरे खाड़ी देश की है। उसका जन्म 1960 में हुआ था, जिसका मतलब है कि उसकी असली उम्र 66 साल है, जबकि कुवैती दस्तावेजों में उसे 86 साल का दिखाया गया था। जांच के दौरान उसके पास से उसके अपने देश का ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और दांतों के परीक्षण (टीथिंग टेस्ट) से भी यह पुष्टि हो गई कि उसका जन्म वर्ष 1960 ही है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.