कुवैत की पब्लिक अथॉरिटी फॉर मैनपावर (PAM) ने निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रवासियों और मजदूरों की सैलरी में देरी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने वेतन भुगतान को एक ‘रेड लाइन’ बताया है और इसके लिए कंपनियों के बैंक डिपॉजिट की हर महीने जांच शुरू कर दी गई है। गृह मंत्री फहद अल-यूसुफ के निर्देशों के बाद अब उन कंपनियों पर शिकंजा कसा जा रहा है जो अपने कर्मचारियों को समय पर पैसे नहीं दे रही हैं।

प्रवासियों की सैलरी को लेकर क्या हैं नए नियम?

कुवैत सरकार ने साफ किया है कि कानून के सामने सब बराबर हैं और मजदूरों के हक से कोई समझौता नहीं होगा। नए नियमों के तहत निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

  • सैलरी बैंक ट्रांसफर: आर्टिकल 57 के तहत जिन कंपनियों में 5 या ज्यादा कर्मचारी हैं, उन्हें वेतन सीधे स्थानीय बैंक खातों में जमा करना होगा।
  • फाइल सस्पेंशन: जो कंपनियां नियमित रूप से सैलरी नहीं देंगी, उनकी फाइल को तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा, जिससे वे अपना बिजनेस नहीं चला सकेंगी।
  • सख्त निगरानी: PAM अब हर महीने बैंक रिकॉर्ड की समीक्षा करेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा सही समय पर पहुंचा है।
  • भुगतान की समय सीमा: कंपनियों को वेतन तय तारीख के बाद सातवें दिन तक हर हाल में देना होगा।

कामगारों के लिए कौन सी सुविधाएं शुरू हुई हैं?

सैलरी के लेन-देन को पारदर्शी बनाने के लिए कुवैत सरकार ने कई डिजिटल सुविधाएं और पोर्टल शुरू किए हैं ताकि प्रवासियों को अपनी जानकारी के लिए भटकना न पड़े। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:

सुविधा का नाम विवरण
Sahel App प्रवासी अपनी सैलरी में होने वाली कटौती और उसका कारण इस ऐप पर देख सकते हैं।
AS’HAL Portal कंपनियों को अपनी पूरी सैलरी रिपोर्ट इसी पोर्टल पर डालनी अनिवार्य है।
Central Bank Link सैलरी की निगरानी के लिए अब PAM और बैंकों के बीच सीधा ऑटोमेटेड लिंक बनाया गया है।

नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होगी कार्रवाई?

कुवैत सरकार ने चेतावनी दी है कि जो कंपनियां कानून तोड़ेंगी उन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई कंपनी लगातार तीन महीने तक सैलरी में देरी करती है, तो उस पर सख्त कानूनी पेनाल्टी लगाई जाएगी। ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के बीच कुवैत का यह फैसला भारतीय और अन्य विदेशी कामगारों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों की फाइल तभी दोबारा खोली जाएगी जब वे सभी बकाया भुगतान कर देंगी और नियमों का पालन करने का भरोसा देंगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.