कुवैत सरकार ने आतंकवाद और उसकी फंडिंग के खिलाफ बहुत सख्त कदम उठाए हैं। State Security Court ने साफ कहा है कि किसी भी आतंकी संगठन का साथ देना देश की सुरक्षा और शांति के लिए बड़ा खतरा है। सरकार ने अब नए कानून बनाए हैं और खास अदालतें भी शुरू की हैं ताकि ऐसे अपराधियों को जल्दी और कड़ी सजा मिल सके।
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कुवैत में आतंकवाद के खिलाफ कौन से नए कानून आए हैं?
- सख्त सजा: 17 मार्च 2026 को Decree Laws No. 47 और 13 जारी किए गए। इसमें आतंकी गतिविधियों की परिभाषा को बढ़ाया गया है और दोषियों के लिए उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान रखा गया है।
- स्पेशल कोर्ट: 1 अप्रैल 2026 को केवल आतंकवाद और राज्य की सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाई गईं क्योंकि ऐसे केसों में 500% की बढ़ोतरी हुई थी।
- अलग जांच टीम: अटॉर्नी जनरल ने 30 मार्च 2026 को राज्य सुरक्षा और टेरर फाइनेंसिंग के लिए एक अलग प्रॉसिक्यूशन (Prosecution) टीम का गठन किया है।
पैसों के लेन-देन और गिरफ्तारियों पर क्या एक्शन लिया गया?
कुवैत ने अब पैसों के जरिए होने वाली आतंकी फंडिंग को रोकने के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इससे आम लोगों और खासकर प्रवासियों को वित्तीय लेन-देन में अधिक सावधानी बरतनी होगी।
- बड़ी गिरफ्तारियां: 12 और 13 अप्रैल 2026 को 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 5 पूर्व सांसद भी शामिल थे। इन सभी पर आतंकी संगठनों को पैसा देने का शक है।
- लिस्ट में नाम: कुवैत की आतंकवाद सूची में अब 219 नाम हो गए हैं। इन लोगों की संपत्ति फ्रीज कर दी गई है और इनके सफर पर रोक लगा दी गई है।
- इंश्योरेंस में कैश बैन: 6 मई 2026 को इंश्योरेंस रेगुलेटरी यूनिट ने आदेश दिया कि इंश्योरेंस सेक्टर में अब कैश पेमेंट नहीं चलेगा। यह नियम 22 अप्रैल से लागू हो चुका है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग को रोका जा सके।
- FATF की निगरानी: फरवरी 2026 में Financial Action Task Force (FATF) ने कुवैत को निगरानी सूची में रखा था, जिसके बाद सरकार ने इन नियमों को और कड़ा किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कुवैत में आतंकी संगठनों की मदद करने पर क्या सजा हो सकती है?
नए कानून (Decree Laws 47 और 13) के तहत आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों को उम्रकैद या मौत की सजा तक दी जा सकती है।
इंश्योरेंस सेक्टर में कैश पेमेंट पर रोक क्यों लगाई गई?
इंश्योरेंस रेगुलेटरी यूनिट के रेजोल्यूशन No. 32 के तहत कैश बैन लगाया गया है ताकि पैसों की हेराफेरी और टेरर फंडिंग को रोका जा सके और FATF के मानकों को पूरा किया जा सके।