Strait of Hormuz Update: कुवैत ने दुनिया के सामने रखी सुरक्षा की मांग, शेख मिशाल की अगुवाई में हुई बड़ी मीटिंग
Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को लेकर दुनिया भर में तनाव का माहौल है. इस बीच कुवैत ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय मीटिंग में हिस्सा लिया ताकि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके. शेख मिशाल अल-अहमद अल-जाबिर अल-सबाह ने इस बैठक की अगुवाई की और साफ कहा कि समुद्र में चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए.
Strait of Hormuz की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?
फ्रांस और ब्रिटेन ने पेरिस में एक खास कॉन्फ्रेंस की जिसमें दुनिया के कई देशों ने हिस्सा लिया. कुवैत के विदेश मंत्री शेख जराह जबिर अल-अहमद अल-सबाह ने इस कोशिश की तारीफ की. उन्होंने बताया कि यह रास्ता पूरी दुनिया के लिए तेल, गैस और खाने-पीने की चीजों की सप्लाई के लिए बहुत जरूरी है. वहीं जर्मनी ने भी इस सुरक्षा मिशन में अपनी मदद देने की इच्छा जताई है.
ईरान और अमेरिका के बीच क्या विवाद चल रहा है?
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की है, जिससे बहुत सारा तेल और गैस वहां फंसा हुआ है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने कहा कि रास्ता कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है, लेकिन उन्हें ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों पर चलना होगा. दूसरी तरफ, अमेरिका के जनरल डैन केन ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज उनकी घेराबंदी तोड़ने की कोशिश करेगा, तो उन पर हमला किया जाएगा.
जरूरी तारीखें और हुई घटनाएं
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 2 अप्रैल 2026 | ब्रिटेन की मीटिंग में कुवैत ने रास्ते की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर बात की |
| 7 अप्रैल 2026 | UN सुरक्षा परिषद ने समुद्री सुरक्षा के प्रस्ताव पर वोटिंग की |
| 8 अप्रैल 2026 | ईरान ने जहाजों के लिए तय रास्तों का नोटिस जारी किया |
| 16 अप्रैल 2026 | कुवैत और अन्य खाड़ी देशों ने UN महासभा में संयुक्त बयान दिया |
| 17 अप्रैल 2026 | शेख मिशाल की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय मीटिंग हुई |
| 17 अप्रैल 2026 | फ्रांस और ब्रिटेन ने पेरिस में सुरक्षा कॉन्फ्रेंस की |
| 17 अप्रैल 2026 | ईरान ने कमर्शियल जहाजों के लिए रास्ता खुला होने का दावा किया |
आम लोगों और व्यापार पर इसका क्या असर होगा?
जब समुद्र के इस मुख्य रास्ते पर तनाव बढ़ता है, तो तेल और गैस की सप्लाई रुक जाती है. इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है और सामान पहुंचने में देरी होती है. खाड़ी देश अब संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक नया प्रस्ताव लाने की तैयारी करेंगे ताकि जहाजों की आवाजाही बिना किसी डर के हो सके और व्यापार फिर से सामान्य हो जाए.