Kuwait MOFA Action: कुवैत ने ईरान के राजदूत को दूसरी बार किया तलब, मिसाइल और ड्रोन हमलों में 2 जवानों की मौत
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत मोहम्मद तूतोनची (Mohammad Toutonchi) को 10 दिनों के भीतर दूसरी बार तलब किया है। यह कार्रवाई कुवैती क्षेत्र में लगातार हो रहे ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के कड़े विरोध में की गई है। कुवैत के गृह मंत्रालय ने बताया है कि 9 मार्च की सुबह हुए एक हमले में 2 बॉर्डर गार्ड्स की जान चली गई। लगातार हो रहे इन हमलों से गल्फ देशों में रहने वाले लोगों और आम जनता की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हमलों का घटनाक्रम और नुकसान
हाल ही में कुवैत के कई महत्वपूर्ण नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। कुवैत के उप विदेश मंत्री अजीज रहीम अल-दैहानी ने ईरानी राजदूत के सामने इस विषय पर सख्त ऐतराज दर्ज कराया है। कुवैत सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया है। नीचे दिए गए टेबल में हालिया हमलों का विवरण है।
| तारीख | घटना का विवरण |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Terminal 1) और एयर बेस पर हमला |
| 2-6 मार्च 2026 | हमलों की रोकथाम के दौरान 67 आर्मी जवान घायल |
| 7 मार्च 2026 | सोशल सिक्योरिटी बिल्डिंग और फ्यूल टैंक पर ड्रोन हमला |
| 9 मार्च 2026 | 2 बॉर्डर गार्ड्स की मौत, ईरानी राजदूत दूसरी बार तलब |
प्रवासियों और आम लोगों पर असर
कुवैत और अन्य गल्फ देशों में बड़ी संख्या में भारतीय और विदेशी नागरिक काम करते हैं। कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अन्य रिहायशी इलाकों के पास हुए हमलों से वहां रहने वाले प्रवासियों की चिंताएं बढ़ी हैं। कुवैत सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि वह अपने नागरिकों और देश में रहने वाले सभी प्रवासियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आम लोगों को खतरे में डालना पूरी तरह से गलत माना जाता है।
गल्फ देशों का रुख और कुवैत का कड़ा संदेश
इन हमलों का असर केवल कुवैत तक सीमित नहीं है। हाल ही में बहरीन की सित्रा ऑयल रिफाइनरी और सऊदी अरब के कुछ हिस्सों को भी ऐसे ही हमलों का सामना करना पड़ा है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सभी सदस्य देशों ने मिलकर इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है। कतर के प्रधानमंत्री ने भी इन हमलों को भरोसे की कमी बताया है। कुवैत ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को पत्र लिखकर चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत अपने बचाव का अधिकार सुरक्षित रखा है।





