कुवैत के गृह मंत्रालय (Ministry of Interior) ने सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि एम्बुलेंस, पुलिस या फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी गाडि़यों को रास्ता न देने वाले ड्राइवरों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही सरकार ने उन महिलाओं के लिए भी राहत की खबर दी है जिनकी नागरिकता रद्द हो गई है और वे सरकारी मकानों में रह रही हैं।

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कितना लगेगा जुर्माना और क्या होगी सजा?

नए नियमों के अनुसार, अगर कोई ड्राइवर सायरन बजाती हुई पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ी का रास्ता रोकता है, तो उस पर 150 से 300 कुवैती दीनार (KD) तक का जुर्माना लगाया जाएगा। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 40,000 रुपये तक होती है।

जुर्माने के अलावा, गलती करने वाले ड्राइवर को तीन महीने तक की जेल भी हो सकती है। मंत्रालय ने यह भी बताया है कि कई बार लोग ट्रैफिक से बचने के लिए एम्बुलेंस के ठीक पीछे अपनी गाड़ी लगा लेते हैं। अब ऐसा करने वाले ड्राइवरों पर भी यही जुर्माना और सजा लागू होगी। ड्राइवरों को निर्देश दिया गया है कि इमरजेंसी वाहन आते ही अपनी गाड़ी की स्पीड कम करें और सड़क के दाहिनी ओर (Right Side) हट जाएं।

नागरिकता रद्द होने पर घर खाली करने के लिए मिला ज्यादा समय

कुवैत की पब्लिक अथॉरिटी फॉर हाउसिंग वेलफेयर (PAHW) ने एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। जिन महिलाओं की कुवैती नागरिकता रद्द कर दी गई है, उन्हें अब सरकारी किराये के मकान खाली करने के लिए पूरे 5 साल का समय मिलेगा।

इससे पहले यह बात सामने आ रही थी कि ऐसी महिलाओं को सिर्फ 2 साल में घर खाली करना होगा, जिसे अब सुधार दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला कैबिनेट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है, जिससे प्रभावित परिवारों को अपना इंतजाम करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.