कुवैत ने एक बार फिर फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपनी मजबूती दिखाई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में कुवैत के राजदूत नासिर अल-हायेन ने फिलिस्तीन का समर्थन किया और इसराइल की सेना द्वारा किए जा रहे उल्लंघनों की कड़ी निंदा की। यह बयान उस समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

कुवैत का पुराना और मजबूत स्टैंड

राजदूत नासिर अल-हायेन ने साफ किया कि कुवैत हमेशा फिलिस्तीन के हक में खड़ा रहा है। कुवैत की मांग है कि फिलिस्तीन एक आजाद देश बने जिसकी राजधानी पूर्वी जेरूसलम हो। यह मांग 4 जून 1967 की सीमाओं और अरब शांति पहल के आधार पर की गई है। राजदूत अल-हायेन अगस्त 2022 से जेनेवा में कुवैत के प्रतिनिधि के रूप में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता

सिर्फ कुवैत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े संगठन भी इस मुद्दे पर बोल रहे हैं। यूरोपीय संघ (EU) ने 15 जून 2026 को UN मानवाधिकार परिषद में एक बयान दिया। EU ने कहा कि इसराइल एक कब्जा करने वाली ताकत है और उसे वहां की आबादी की रक्षा करनी चाहिए। साथ ही, गाजा और वेस्ट बैंक में किसी भी तरह के क्षेत्रीय या जनसांख्यिकीय बदलाव को खारिज कर दिया गया।

जमीनी हालात और UN की चेतावनी

  • UN महासचिव का बयान: एंटोनियो गुटेरेस ने चिंता जताई कि वेस्ट बैंक में बस्तियों के हमले 1,000 के पार पहुंच गए हैं, जिससे 2,200 से ज्यादा फिलिस्तीनी विस्थापित हुए।
  • सुरक्षा परिषद की चर्चा: 10 जून को हुई एक चर्चा में गुटेरेस ने चेतावनी दी कि मिडिल ईस्ट गहराते संकट में फंस रहा है और गाजा में आग अब भी नहीं बुझी है।
  • फिलिस्तीन का आरोप: फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने 14 जून को दैर दिबवान और बुर्का में हुए हमलों को संगठित आतंकवाद करार दिया।

अरब देशों की एकजुटता

इससे पहले 5 जून 2026 को कुवैत समेत कई अरब और इस्लामिक देशों ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया था। इसमें अमेरिका के इसराइल राजदूत की उन टिप्पणियों का विरोध किया गया, जिनमें अरब राज्यों की जमीनों पर इसराइल के नियंत्रण की बात कही गई थी। सभी सदस्य देशों ने साफ किया कि इसराइल की इन जमीनों पर कोई संप्रभुता नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है।