कुवैत ने एक बार फिर दुनिया के सामने इसराइल का मुद्दा उठाया है। कुवैत चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसराइल पर दबाव डाले ताकि वह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाली संधि (NPT) में शामिल हो। कुवैत का कहना है कि इसराइल की परमाणु सुविधाओं की जांच होनी चाहिए ताकि दुनिया में शांति और सुरक्षा बनी रहे।

क्या है कुवैत की मांग

कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जून 2026 को कुवैत ने जोर देकर कहा कि दुनिया को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कुवैत की मांग है कि इसराइल बिना किसी अपवाद के अपनी सभी परमाणु सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निगरानी सिस्टम के तहत लाए। यह मांग अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों को लागू करने के लिए की गई है ताकि यह पक्का हो सके कि परमाणु सामग्री का इस्तेमाल गलत कामों के लिए नहीं हो रहा है।

पुराने बयानों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला

कुवैत लंबे समय से इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहा है। इससे पहले 5 मई 2026 को संयुक्त राष्ट्र में कुवैत के प्रतिनिधि अब्दुलअज़ीज़ अल-सैदी ने भी इसी बात को दोहराया था। उन्होंने मांग की थी कि जब तक इसराइल की परमाणु नीति साफ नहीं होती, तब तक IAEA को उसके साथ सहयोग बंद कर देना चाहिए। इसके अलावा कुवैत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 487 और अन्य अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी जिक्र किया है जो इसराइल को परमाणु संधि में शामिल होने के लिए कहते हैं।

इसराइल का क्या रुख है

इसराइल अभी तक परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाली संधि (NPT) का हिस्सा नहीं बना है। दुनिया भर में यह माना जाता है कि इसराइल के पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन उसने कभी भी इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है। हालांकि इसराइल IAEA का सदस्य है, लेकिन उसने केवल कुछ खास सुविधाओं के लिए ही समझौते किए हैं, जबकि कुवैत चाहता है कि उसके सभी परमाणु केंद्रों की पूरी तरह से जांच हो।

Sushma Kumari

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