कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्रों में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कुवैत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के समुद्री कानून (UNCLOS) को पूरी तरह से लागू किया जाए ताकि समुद्र में व्यापार और यात्रा बिना किसी रुकावट के चलती रहे। यह मामला खासकर Strait of Hormuz जैसे अहम रास्तों की सुरक्षा से जुड़ा है।

कुवैत ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही है। इसमें खास तौर पर आर्टिकल 38 का जिक्र किया गया है जो जहाजों को आने-जाने (transit passage) का अधिकार देता है। कुवैत ने UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का भी स्वागत किया है। इस प्रस्ताव में कुवैत और अन्य GCC देशों पर होने वाले गलत हमलों की निंदा की गई है और Strait of Hormuz को बंद करने या अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में बाधा डालने वाले कदमों का विरोध किया गया है।

Mauritius में आयोजित 9वें Indian Ocean Conference (IOC 2026) के दौरान कुवैत के राजदूत Salem Al-Shebli ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि कुवैत समुद्री रास्तों की आजादी का पूरा समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। राजदूत ने चेतावनी दी कि अगर Strait of Hormuz जैसे रास्तों पर जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट आती है, तो इससे समुद्री सुरक्षा और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को खतरा हो सकता है।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब UN मुख्यालय में 15 से 19 जून 2026 तक UNCLOS के सदस्य देशों की 36वीं बैठक हुई। इस बैठक में International Tribunal for the Law of the Sea और International Seabed Authority जैसी संस्थाओं ने अपनी रिपोर्ट पेश की। कुवैत की यह मांग इसी वैश्विक चर्चा का हिस्सा है ताकि समुद्र में शांति बनी रहे और व्यापार प्रभावित न हो।