Kuwait में युद्ध का असर, अब प्रिवटाइजेशन कानून पर छिड़ी बहस, सरकारी कंपनियों को बेचने की उठी मांग

क्षेत्र में चल रहे युद्ध ने कुवैत की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है। तेल के निर्यात में आई गिरावट और भारी आर्थिक नुकसान के कारण अब देश में प्रिवटाइजेशन यानी निजीकरण की मांग फिर से तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट घाटे को कम करने के लिए अब पुराने नियमों को बदलना बहुत जरूरी हो गया है।

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प्रिवटाइजेशन की मांग क्यों उठ रही है?

आर्थिक विशेषज्ञ Ahmed Al-Khashnam ने बताया कि कुवैत की राष्ट्रीय आय का 95% से ज्यादा हिस्सा केवल तेल पर निर्भर है। युद्ध की वजह से तेल निर्यात में रुकावट आई है जिससे सरकारी खजाने को अरबों दीनार का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार हाउसिंग, पब्लिक वर्क्स और हेल्थ मिनिस्ट्री के कुछ हिस्सों का निजीकरण करती है, तो कमाई के नए स्रोत खुलेंगे और विदेशी निवेश भी बढ़ेगा।

युद्ध का बिजनेस और कॉन्ट्रैक्ट्स पर क्या असर हुआ?

19 अप्रैल 2026 को आई एक लीगल स्टडी के मुताबिक, इस युद्ध ने कुवैत में बिजनेस चलाने के तरीकों को बदल दिया है। कई सरकारी और निजी कॉन्ट्रैक्ट्स अब ‘फोर्स मेज्योर’ यानी अप्रत्याशित परिस्थितियों के दायरे में आ गए हैं। इस वजह से बिजनेस को चलाने में दिक्कतें आ रही हैं और सरकार ने एहतियात के तौर पर सरकारी विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम करने जैसे कदम उठाए हैं।

Dhaman प्रोजेक्ट में क्या बड़ा बदलाव हुआ है?

सरकार ने Decree-Law No. 50 of 2026 लागू किया है जिससे Health Assurance Hospitals Company (Dhaman project) के मालिकाना हक में बदलाव किया गया है। अब इस कंपनी का 50% हिस्सा Kuwait Investment Authority (KIA) के पास होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस बड़े प्रोजेक्ट को बिना किसी कानूनी विवाद के तेजी से पूरा किया जा सके।

मुख्य जानकारी विवरण
युद्ध शुरू होने की तारीख 28 फरवरी
तेल पर निर्भरता 95% से ज्यादा
नया कानून Decree-Law No. 50 of 2026
KIA की हिस्सेदारी Dhaman प्रोजेक्ट में 50%
प्रमुख विशेषज्ञ Ahmed Al-Khashnam और Dr. Manal Al-Kandari
लीगल स्टडी तारीख 19 अप्रैल 2026
प्रभावित सेक्टर तेल निर्यात, हेल्थ और पब्लिक वर्क्स