Kuwait का बड़ा बयान, समुद्री रास्तों को हथियार बनाना गलत, Strait of Hormuz में ‘लीगल पाइरेसी’ की चेतावनी

कुवैत ने समुद्री रास्तों के जरिए दबाव बनाने और उन्हें हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिशों का कड़ा विरोध किया है। देश की सेना ने हाल ही में विस्फोटक अवशेषों को हटाने का काम पूरा किया है ताकि आम जनता को कोई खतरा न हो। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुवैत ने साफ किया है कि समुद्र के रास्तों में रुकावट पैदा करना पूरी दुनिया के व्यापार के लिए खतरनाक है।

कुवैत सेना की EOD टीम ने क्या किया और क्यों सुनाई दी धमाकों की आवाज?

कुवैत सशस्त्र बल के जनरल स्टाफ ने बताया कि Land Force Engineering Unit की Explosive Ordnance Disposal (EOD) टीम ने इलाके से पुराने शrapnel और विस्फोटक अवशेषों को हटाने का काम किया। यह ऑपरेशन 21 अप्रैल को शाम 6 बजे तक चला। सेना ने स्पष्ट किया कि इस दौरान सुनाई देने वाले धमाके नियंत्रित थे और इनसे जनता को कोई खतरा नहीं था। यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षा उपायों का हिस्सा थी ताकि बिना फटे विस्फोटक सामान को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जा सके।

Strait of Hormuz और समुद्री रास्तों पर कुवैत की क्या चेतावनी है?

WIPO की मीटिंग में राजदूत Nasser Al-Hayen ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल राजनीतिक या आर्थिक दबाव के लिए करना ‘लीगल पाइरेसी’ यानी कानूनी डकैती जैसा है। उन्होंने Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने की मांग की ताकि सामान और नई तकनीक की सप्लाई न रुके। कुवैत के राजदूत Tareq Al Banai ने भी UN में कहा कि नेविगेशन की आजादी छीनने से ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ेगा। कुवैत अब UN में एक नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है ताकि समुद्री रास्तों की सुरक्षा पक्की हो सके।

ईरान के हमलों और तेल शिपमेंट पर क्या अपडेट आया है?

अरब लीग ने एक विशेष मीटिंग की जिसमें ईरान द्वारा अरब देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की गई। दूसरी तरफ, 20 अप्रैल को कुवैत ने Strait of Hormuz में अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाए गए ब्लॉकडे की वजह से अपने तेल शिपमेंट पर ‘फोर्स मेज्युर’ (force majeure) घोषित कर दिया। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह किसी भी ऐसे एकतरफा कदम को नहीं मानता जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हो। देश के राजदूत Salem Al-Shibli ने साफ किया कि कुवैत की जमीन का इस्तेमाल किसी देश पर हमला करने के लिए नहीं होगा।