कुवैत सरकार ने इंटरनेट चलाने वाली समुद्र के नीचे बिछी केबल्स पर हमले को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। जेनेवा में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की बैठक के दौरान कुवैत ने ईरान और उसके साथियों पर गंभीर आरोप लगाए। कुवैत का कहना है कि इस तरह के हमलों से देशों की सुरक्षा और इंटरनेट सेवाओं को बड़ा खतरा हो सकता है।
कुवैत ने ITU के सामने क्या आरोप लगाए
कुवैत के राजदूत Nasser Al-Hain ने जेनेवा में ITU काउंसिल के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समुद्र के नीचे की इंटरनेट केबल्स को निशाना बनाकर एक डिजिटल नाकेबंदी करने की कोशिश की जा रही है। इससे पूरी दुनिया में जानकारी का आदान-प्रदान और बिजनेस के काम रुक सकते हैं। कुवैत और उसके पड़ोसी देशों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में अरबों डॉलर खर्च किए हैं, जिसे राजनीतिक दबाव के लिए इस्तेमाल करना गलत है।
ईरान की हरकतों और समुद्री रास्तों पर खतरा
कुवैत ने साफ तौर पर कहा कि ईरान के हमले देश की संप्रभुता और डिजिटल सुरक्षा के खिलाफ हैं। खासकर Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। इससे पहले अप्रैल 2026 में ईरान की Tasnim न्यूज़ एजेंसी ने भी इन केबल्स की कमजोरी के बारे में रिपोर्ट छापी थी, जिसमें इन केबल्स को दबाव बनाने का जरिया बताया गया था।
नियमों का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कदम
कुवैत ने ITU के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आर्टिकल 37 और 40 के तहत देशों को एक-दूसरे की सेवाओं में दखल देने से बचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि GCC देशों और जॉर्डन ने भी एक ड्राफ्ट प्रस्ताव तैयार किया है ताकि इन बढ़ते खतरों से निपटा जा सके और इंटरनेट सेवाओं को सुरक्षित रखा जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कुवैत ने ईरान पर क्या आरोप लगाया है
कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान और उसके साथी समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स पर हमला कर रहे हैं ताकि डिजिटल नाकेबंदी की जा सके और दबाव बनाया जा सके।
इस हमले से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
अगर समुद्र के नीचे की इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुँचता है, तो इंटरनेट कनेक्टिविटी ठप हो सकती है, जिससे वैश्विक व्यापार और सूचनाओं के लेनदेन पर बुरा असर पड़ेगा।