इंटरनेट की दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है. कुवैत ने समुद्री इंटरनेट केबल्स पर होने वाले हमलों को लेकर गहरा दुख जताया है. कुवैत का कहना है कि ईरान और उसके साथी देशों की वजह से ग्लोबल इंटरनेट सेवाओं पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे पूरी दुनिया का कामकाज रुक सकता है.

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कुवैत ने ITU में क्या आरोप लगाए

29 अप्रैल 2026 को Geneva में International Telecommunication Union (ITU) की काउंसिल की मीटिंग हुई. इस मीटिंग में कुवैत के राजदूत Ambassador Nasser Al-Hain ने एक आधिकारिक बयान दिया. उन्होंने कहा कि ईरान और उसके regional allies संचार क्षेत्र (communications sector) पर खुलेआम हमले कर रहे हैं. कुवैत के मुताबिक, यह किसी देश की संप्रभुता और डिजिटल सुरक्षा के खिलाफ है और इससे एक तरह का डिजिटल ब्लॉकेड लगाया जा सकता है.

इंटरनेट केबल्स कटने से क्या नुकसान हो सकता है

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समुद्र के नीचे बिछी ये केबल्स खराब होती हैं, तो आम जनता को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. analyst Masha Kotkin ने बताया कि इससे इंटरनेट की रफ्तार धीमी हो जाएगी और कई जगह नेटवर्क पूरी तरह बंद हो सकता है. इसका सीधा असर e-commerce और बैंक के लेन-देन पर पड़ेगा, जिससे बड़ा आर्थिक नुकसान होगा. Strait of Hormuz और Red Sea जैसे इलाके बहुत संवेदनशील हैं क्योंकि यहाँ से एशिया और यूरोप को जोड़ने वाली बड़ी केबल्स गुजरती हैं.

बचाव के लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं

इस खतरे से निपटने के लिए GCC देशों और Jordan ने मिलकर एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया है. कुवैत ने ITU के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि Article 37 के तहत देशों को सीमा पार होने वाले नुकसानदेह हस्तक्षेप को रोकना चाहिए. साथ ही Article 40 के तहत जरूरी सेवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी. इससे पहले ईरान की Tasnim news agency ने भी चेतावनी दी थी कि Hormuz जलडमरूमध्य में केबल्स को नुकसान पहुँचाने से पूरे खाड़ी क्षेत्र में इंटरनेट ठप हो सकता है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

समुद्री इंटरनेट केबल्स के कटने से आम आदमी पर क्या असर होगा

विशेषज्ञों के अनुसार इंटरनेट की स्पीड कम हो जाएगी, ऑनलाइन शॉपिंग (e-commerce) में दिक्कत आएगी और बैंक के पैसों के लेन-देन में देरी होगी, जिससे आर्थिक परेशानी हो सकती है.

कुवैत ने किस अंतरराष्ट्रीय संस्था के सामने यह बात रखी

कुवैत ने यह बयान International Telecommunication Union (ITU) की काउंसिल के सामने Geneva में दिया, जहाँ डिजिटल सुरक्षा और नियमों पर चर्चा होती है.