अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक अहम समझौता (MoU) हुआ है. कुवैत ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे क्षेत्र में शांति के लिए एक बड़ा कदम बताया है. इस समझौते से अब सैन्य हमले रुकेंगे और समुद्र के रास्तों पर आवाजाही आसान होगी, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता आएगी.

🗞️: Saudi Arabia Law: सऊदी अरब में झगड़े का वीडियो सोशल मीडिया पर डालना पड़ा भारी, Tabuk पुलिस ने 3 लोगों को किया गिरफ्तार

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने 15 जून 2026 को एक बयान जारी कर इस समझौते का समर्थन किया. मंत्रालय ने कहा कि यह कदम तनाव घटाने और Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बहुत जरूरी था. कुवैत ने इस बीच पाकिस्तान और कतर जैसे देशों की तारीफ की, जिन्होंने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने में मदद की.

समझौते की मुख्य बातें

यह समझौता 14 पॉइंट्स का एक दस्तावेज है, जिसके तहत 60 दिनों का एक अंतरिम ढांचा तैयार किया गया है. इसमें कुछ खास शर्तें शामिल हैं:

  • सभी सैन्य ऑपरेशंस को तुरंत और हमेशा के लिए रोका जाएगा.
  • Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की आजादी की गारंटी दी गई है.
  • शुरुआती 30 दिनों के भीतर ईरान की सेना समुद्र में बिछाई गई माइंस (बारूदी सुरंगों) को हटाने का काम करेगी.
  • अगले 60 दिनों तक जहाजों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा.
  • अमेरिका ईरान पर लगाई गई अपनी नौसेना की नाकाबंदी (blockade) को हटा लेगा.

इस समझौते का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु बातचीत को आगे बढ़ाना है. अगर ईरान शर्तों को मानता है, तो उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी.

बड़े नेताओं और देशों का क्या कहना है

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया कि उन्होंने Strait of Hormuz को टोल-फ्री खोलने और नौसेना की नाकाबंदी हटाने की मंजूरी दे दी है. वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस डील की घोषणा करते हुए कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान दोनों ही डिप्लोमैटिक समाधान चाहते थे. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने भी इसे शांति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया.

ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, तुर्की, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों ने भी इस समझौते का स्वागत किया है. हालांकि, इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz और वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने इस पर शक जताया है और कहा है कि इसराइल अपनी मुहिम जारी रखेगा.

इस पूरे समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे. बता दें कि यह विवाद फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जिसके बाद अप्रैल में एक छोटा ब्रेक लिया गया था.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com