कुवैत में बिजली ग्रिड पर बढ़ते दबाव और ईरान के हमलों के कारण सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम करने पर विचार किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार पावर स्टेशनों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे बिजली व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। 20 जुलाई 2026 को एक पावर स्टेशन में आग लगने की घटना के बाद सरकार इस दिशा में गंभीरता से सोच रही है।
लगातार हो रहे हैं पावर प्लांट पर हमले
कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ईरान की ओर से किए गए हमलों के कारण कई जनरेटर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। 19 जुलाई 2026 को भी एक पावर प्लांट पर हमला हुआ था, जिससे वहां काम प्रभावित हुआ। इससे पहले 17 और 18 जुलाई को भी पावर और डिसेलिनेशन प्लांट्स पर हमले हुए थे। कुवैती सेना ने जानकारी दी कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई बार दुश्मन के ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया है। मंत्रालय ने बार-बार नागरिकों से बिजली की खपत कम करने की अपील की है।
पहले भी लिए जा चुके हैं ऐसे फैसले
यह पहली बार नहीं है जब कुवैत अपनी ऊर्जा जरूरतों को बचाने के लिए काम कर रहा है। मार्च 2026 में सिविल सर्विस कमीशन ने सरकारी दफ्तरों में उपस्थिति 30 प्रतिशत तक सीमित कर दी थी। इसके अलावा, मई से सितंबर 2026 के बीच बिजली बचाने के लिए औद्योगिक इकाइयों को पीक आवर्स के दौरान काम बंद रखने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने काम के घंटों में कटौती का प्रस्ताव भी गर्मियों के तीन महीनों के लिए लागू किया था ताकि बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
