Lahore Custodial Death: लाहौर में दो महिलाओं की पुलिस कस्टडी में मौत, ह्यूमन राइट्स वॉच ने की स्वतंत्र जांच की मांग

लाहौर में पुलिस कस्टडी में दो महिलाओं की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है, और मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch ने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। 5 अगस्त 2026 को हुई इस घटना में 22 साल की अनमोल और 17 साल की अमीन की मौत पुलिस हिरासत के दौरान हो गई थी। इस मामले को लेकर आम लोगों और मानवाधिकार संगठनों में काफी गुस्सा देखा जा रहा है, क्योंकि पुलिस कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस कस्टडी में मौत और परिवार के आरोप
ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया में बहुत ज्यादा देरी की गई और पुलिस बर्बरता के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। संगठन ने पाकिस्तानी प्रशासन से कहा है कि साल 2022 का Torture and Custodial Death Prevention and Punishment Act सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके। इस बारे में अधिक जानकारी ANI News की रिपोर्ट में दी गई है।
पुलिस का बयान और मजिस्ट्रेट की जांच
लाहौर के पुलिस अधिकारियों, जिनमें कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर बिलाल सिद्दीकी कम्याना भी शामिल हैं, उन्होंने टॉर्चर के सभी आरोपों से साफ इंकार किया है। पुलिस का शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से कहना है कि महिलाओं की मौत दिल का दौरा यानी cardiac arrest पड़ने से हुई थी और उनके शरीर पर हिंसा के कोई निशान नहीं मिले थे। हालांकि, मरने वाली लड़कियों के परिवार वालों ने पुलिस के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। परिवार का कहना है कि उनके शरीर पर मारपीट के साफ निशान थे और उन्हें चुप रहने के लिए पैसे यानी रिश्वत देने की पेशकश भी की गई थी। इस संबंध में विस्तार से HRCP की रिपोर्ट में बताया गया है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की स्थिति
इस मामले में मजिस्ट्रेट कामरान करामत की तरफ से एक न्यायिक जांच भी की गई है, जिसमें टॉर्चर की बात से इनकार किया गया है। लेकिन ह्यूमन राइट्स वॉच का साफ कहना है कि ऐसी जांच किसी भी आपराधिक और स्वतंत्र जांच का विकल्प नहीं हो सकती है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया है कि साल 2022 के कानून के तहत अभी तक किसी भी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है, जिससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।