लेबनान में शांति के लिए होने वाला समझौता अब वहां के शहरों में नहीं बल्कि दुनिया के बड़े देशों के बीच तय हो रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस डील की असली डोर अमेरिका, ईरान और कुछ खास देशों के हाथ में है। इस पूरी प्रक्रिया में लेबनान की अपनी भूमिका अब कम होती दिख रही है।
Al Jazeera के एनालिस्ट Sami Halabi ने बताया कि असली समझौता बेरूत में नहीं हो रहा। उनके मुताबिक यह डील एक बड़े क्षेत्रीय ट्रैक के जरिए तय की जा रही है, जिसमें अमेरिका, ईरान और कुछ मध्यस्थ देश शामिल हैं। यह पूरा मामला तेहरान के हिज़बुल्लाह को दिए निर्देशों, वाशिंगटन की गारंटियों और इसराइल की मांगों पर टिका है।
हाल ही में 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक MoU साइन किया। इसमें लेबनान में लड़ाई रोकने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों के भीतर एक बड़े समझौते पर पहुंचने की बात कही गई। ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि लेबनान की संप्रभुता और उसकी सीमाओं का सम्मान होना चाहिए।
इसके बाद 28 और 29 जून 2026 को इसराइल, लेबनान और अमेरिका के बीच एक ‘Trilateral Framework Agreement’ साइन हुआ। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य हिज़बुल्लाह को निशस्त्र करना और लेबनान के अंदरूनी मामलों में ईरान के प्रभाव को कम करना है। हालांकि, ईरान ने इस बात का विरोध किया और कहा कि यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU के खिलाफ है।
शांति की कोशिशों के तहत 22 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक 60 दिनों का रोडमैप तैयार किया गया। इसके जरिए एक ‘Lebanon deconfliction mechanism’ बनाया गया है। यह एक ऐसा सीधा चैनल है जिससे अमेरिका और ईरान आपस में बात करके सैन्य ऑपरेशन्स को रोक सकें। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि इसका मकसद लड़ाई को और बढ़ने से रोकना है।
इस पूरी बातचीत में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ के तौर पर बड़ी भूमिका निभाई है। वहीं, UAE के शेख तहनून बिन जायद भी अमेरिका और ईरान की बातचीत में शामिल रहे। दूसरी तरफ, इसराइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog ने साफ कहा कि कोई भी बातचीत सीधे दोनों देशों के बीच होनी चाहिए और हिज़बुल्लाह का निशस्त्र होना किसी भी स्थायी समाधान के लिए सबसे जरूरी है।
सबसे ताजा अपडेट के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 को अमेरिका और ईरान के अधिकारियों ने दोहा में तकनीकी बातचीत शुरू की। इसका मकसद शांति समझौते को आगे बढ़ाना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है।
