लेबनान के दक्षिणी हिस्से में इसराइल के हमलों ने तबाही मचा रखी है. सबसे ज़्यादा मुश्किल उन सिविल डिफेंस वर्कर्स की हो गई है जो मलबे से लोगों को निकालने और जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, बचाव कार्य में जुटे इन कर्मियों को इसराइल के हमलों का सीधा सामना करना पड़ रहा है.
18 जून को हुए हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई. इनमें से दो लोग Kfar Tebnit के पास एक कार पर हुए ड्रोन हमले में मारे गए, जबकि एक व्यक्ति Zabadin में हमले का शिकार हुआ. लेबनानी नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) ने इन ड्रोन हमलों की पुष्टि की है. लेबनान के सिविल डिफेंस की टीमें अब भी सड़कें साफ करने और लोगों तक पानी पहुँचाने का काम कर रही हैं.
दूसरी तरफ, हिज़्बुल्लाह ने दावा किया कि उसने Kfartebnit और Ali al-Taher इलाकों में चार दिनों तक चले इसराइली हमले को नाकाम कर दिया. इस बीच, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि जब तक सुरक्षा ज़रूरत होगी, उनकी सेना लेबनान के दक्षिणी हिस्से में मौजूद रहेगी. इसराइली सेना ने एक नक्शा भी जारी किया है जिससे पता चलता है कि उन्होंने लेबनान की सीमा के अंदर अपना कंट्रोल इलाका बढ़ा लिया है.
इस हिंसा पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चिंता जताई. 17 जून को उन्होंने कहा कि इसराइल की तरफ से ज़रूरत से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए बातचीत चल रही है, लेकिन ज़मीन पर हमले अब भी जारी हैं.
अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, बचाव कार्य में जुटे सिविल डिफेंस कर्मियों और उनकी इमारतों को निशाना बनाना गलत है. इन कर्मियों की पहचान के लिए नारंगी बैकग्राउंड पर नीले रंग का त्रिभुज (Triangle) इस्तेमाल किया जाता है. कानून के अनुसार, अगर वे सिर्फ मानवीय मदद कर रहे हैं, तो उन पर हमला करना युद्ध अपराध माना जा सकता है.