संयुक्त राष्ट्र (UN) ने लेबनान के मौजूदा हालातों पर एक नई और चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है। इसराइल की सैन्य कार्रवाई और जमीनी हमलों के बीच अब तक 11 लाख लोग बेघर हो चुके हैं। यह संख्या लेबनान की कुल आबादी का करीब पांचवां हिस्सा है। लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं और वहां मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है।

विस्थापित लोगों की क्या है असल स्थिति?

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता Stephane Dujarric ने पुष्टि की है कि विस्थापित होने वाले लोगों में एक बड़ी संख्या बच्चों और महिलाओं की है। करीब 1.37 लाख लोग लगभग 700 सामूहिक आश्रयों में रह रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर स्कूल हैं। बाकी लोग या तो अपने रिश्तेदारों के पास हैं या खुले इलाकों में रहने को मजबूर हैं जहां बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। विस्थापितों में लगभग 6.20 लाख महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं, जिन्हें स्वास्थ्य और सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता है।

हमलों में जान-माल का कितना हुआ नुकसान?

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है और राहत कार्यों के लिए फंड की भारी कमी देखी जा रही है। मुख्य आंकड़ों को नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:

विवरण आंकड़े/स्थिति
कुल विस्थापित लोग 1.1 मिलियन (11 लाख)
कुल मौतें (6 अप्रैल तक) 1,497 (130 बच्चे शामिल)
गर्भवती महिलाएं लगभग 13,500
मारे गए स्वास्थ्य कर्मी 54
जरूरी फंड 308 मिलियन डॉलर
प्राप्त फंड 100 मिलियन डॉलर से कम

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि लेबनान में मानवीय स्थिति बहुत तेज गति से खराब हो रही है। इसराइल के निकासी आदेशों की वजह से लेबनान के 15 प्रतिशत हिस्से पर असर पड़ा है। दक्षिण लेबनान के कई गांवों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे आम नागरिक दहशत में हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध को रोकने और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए लगातार अपील की जा रही है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.