लेबनान में फ़्रांसीसी शांति सैनिकों पर हमला, अब तक 2 सैनिकों की मौत, राष्ट्रपति मैक्रों ने हिज़बुल्ला को ठहराया ज़िम्मेदार
लेबनान के दक्षिणी इलाके में फ़्रांसीसी शांति सैनिकों पर हुए एक हमले में अब तक दो सैनिकों की जान जा चुकी है। शनिवार को हुए इस हमले में स्टाफ सार्जेंट फ्लो्रियन मोंटोरियो की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य घायल सैनिक ने बुधवार को दम तोड़ दिया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
क्या हुआ था इस हमले में और कितना नुकसान हुआ
यह हमला 18 अप्रैल 2026 को लेबनान के देइर किफ़ा इलाके में हुआ था। फ़्रांसीसी सेना की 17वीं पैराशूट इंजीनियर रेजिमेंट के सैनिक एक UNIFIL पोस्ट के लिए रास्ता खोलने का काम कर रहे थे, तभी उन पर अचानक हमला हुआ। इस हमले में स्टाफ़ सार्जेंट फ्लो्रियन मोंटोरियो मारे गए और तीन अन्य सैनिक घायल हुए। घायल सैनिकों में से एक की मौत 22 अप्रैल को इलाज के दौरान हो गई। UNIFIL ने बताया कि यह हमला छोटे हथियारों से किया गया था और यह शांति सैनिकों पर जानबूझकर किया गया हमला था।
मैक्रों और अन्य देशों के अधिकारियों का क्या कहना है
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि सभी सबूत इशारा करते हैं कि इस हमले की ज़िम्मेदारी हिज़बुल्ला की है। उन्होंने लेबनानी अधिकारियों से मांग की है कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। वहीं, फ़्रांसीसी सशस्त्र बल मंत्री कैथरीन वौट्रिन ने बताया कि सैनिक एक ऐसे पोस्ट के लिए रास्ता बना रहे थे जो लड़ाई की वजह से कट गया था। दूसरी तरफ, हिज़बुल्ला ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि लेबनानी सेना की जांच पूरी होने तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए।
लेबनान में मौजूदा हालात और सरकारी प्रतिक्रिया
लेबनान में 16 अप्रैल 2026 की आधी रात से इसराइल और हिज़बुल्ला के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू है। यह पूरा विवाद 2 मार्च 2026 को शुरू हुई जंग का हिस्सा है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इस हमले की निंदा की है। लेबनानी मिलिट्री ट्रिब्यूनल ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और सेना दोषियों को पकड़ने में जुटी है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद भी इस स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं।