लेबनान की संप्रभुता और उसके अधिकारों को बहाल करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। Gulf Cooperation Council (GCC) ने लेबनान के पूरे अधिकारों और उसकी आजादी का समर्थन किया है। इस दिशा में अमेरिका और इसराइल के साथ मिलकर एक नया ढांचा तैयार किया गया है ताकि इलाके में शांति स्थापित हो सके।

GCC और अमेरिका की साझा बैठक

25 जून 2026 को Manama में अमेरिका और GCC के मंत्रियों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया गया जिसमें लेबनान की सुरक्षा, स्थिरता और उसकी सीमाओं के सम्मान की बात कही गई। मंत्रियों ने साफ तौर पर कहा कि लेबनान की पूरी आजादी तब तक मुमकिन नहीं है जब तक वहां गैर-सरकारी सशस्त्र समूह अपनी सैन्य ताकत रखते हैं। इसीलिए उन्होंने इन समूहों को पूरी तरह निशस्त्र करने और लेबनान की सेना को मजबूत बनाने की मांग की।

लेबनान सरकार की प्रतिक्रिया

इस समर्थन पर 26 जून 2026 को लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने GCC का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि यह मदद लेबनान और खाड़ी देशों के बीच पुराने और भाईचारे वाले रिश्तों का नतीजा है। लेबनान के विदेश मंत्री Youssef Raggi ने भी GCC और अमेरिका के साझा बयान की तारीफ की और हथियारों के disarmament की बात का समर्थन किया।

त्रिपक्षीय समझौता और ईरान का विरोध

27 जून 2026 को इसराइल, लेबनान और अमेरिका के बीच एक त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते पर दस्तखत हुए। इस समझौते के तहत एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा जिसमें लेबनान के सैनिक उन इलाकों का कंट्रोल संभालेंगे जहां अभी इसराइली सेना मौजूद है। साथ ही Hezbollah समूह को निशस्त्र करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे शांति की राह पर एक शुरुआती कदम बताया।

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने GCC और अमेरिका के इस बयान को हस्तक्षेप करने वाला और उकसाने वाला बताया है।

पुराना स्टैंड और अंतरराष्ट्रीय नियम

इससे पहले 21 अप्रैल 2026 को GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने भी लेबनान की सुरक्षा का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि लेबनान में स्थिरता तभी आएगी जब हथियार सिर्फ सरकारी सेना के पास होंगे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का पूरा पालन होगा।