लेबनान सरकार का बड़ा फैसला, हिजबुल्लाह से हथियार छुड़ाने की कोशिश, लेकिन संगठन ने किया साफ़ इनकार

लेबनान की सरकार अब देश के सभी हथियारों पर अपना पूरा कंट्रोल चाहती है। सरकार का मकसद हिजबुल्लाह को निशस्त्र करना है ताकि सिर्फ सरकारी सेना के पास ही हथियार रहें। हालांकि, हिजबुल्लाह ने इस मांग को मानने से साफ़ मना कर दिया है, जिससे वहां हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं।

लेबनान सरकार का निशस्त्र करने का प्लान क्या है?

लेबनान की कैबिनेट ने 9 अप्रैल 2026 को सुरक्षा बलों को निर्देश दिया कि वे बेरूत में हथियारों पर सरकारी नियंत्रण लागू करें। इससे पहले मार्च 2026 में हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी। राष्ट्रपति जोसेफ औन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का कहना है कि देश की संप्रभुता के लिए हिजबुल्लाह का निशस्त्र होना जरूरी है। सरकार ने लिटानी और अवाली नदियों के बीच के इलाकों के लिए एक disarmament प्लान भी तैयार किया है, जिसे लागू करने में सेना को समय लगेगा।

हिजबुल्लाह ने इस फैसले का विरोध क्यों किया?

हिजबुल्लाह ने सरकार के इस प्लान को पूरी तरह खारिज कर दिया है। संगठन के प्रमुख शेख नईम कासिम ने इसे एक बड़ी गलती बताया और कहा कि इससे इसराइल को फायदा होगा। हिजबुल्लाह के नेता हसन फदलल्लाह ने साफ किया कि वे किसी भी दबाव में आकर हथियार नहीं छोड़ेंगे। उनका मानना है कि यह एक इसराइली-अमेरिकी साजिश है और वे तब तक हथियार नहीं डालेंगे जब तक इसराइल अपनी शर्तों को पूरा नहीं करता।

अमेरिका और इसराइल का इस मामले में क्या स्टैंड है?

अमेरिका इस समय इसराइल और लेबनान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है। वाशिंगटन में हो रही बैठकों में मुख्य मुद्दा हिजबुल्लाह का भविष्य ही है। दूसरी तरफ, इसराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में अपना सुरक्षा क्षेत्र बना लिया है और वह हिजबुल्लाह के निशस्त्र होने को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी मानता है। वहीं, लेबनान और ईरान के बीच भी तनाव बढ़ गया है और लेबनान ने ईरान के राजदूत को देश छोड़ने को कह दिया है।