लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने युद्ध के बीच एक गंभीर रिपोर्ट जारी की है। मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक इजरायली सेना ने 9 अस्पतालों को निशाना बनाया है। इस स्थिति की वजह से देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा संकट मंडरा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2 मार्च 2026 से शुरू हुए इन हमलों में अब तक 51 मेडिकल स्टाफ अपनी जान गंवा चुके हैं।
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अस्पतालों पर हुए हमलों का क्या हुआ असर?
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि इजरायली हवाई हमलों की वजह से स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। हमलों के कारण 5 अस्पतालों को अपनी सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ी हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल कर्मियों और अस्पतालों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन है। इन हमलों की वजह से आम नागरिकों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो गया है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने का डर है।
विभिन्न संस्थाओं द्वारा जारी किए गए आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने लेबनान की स्थिति पर चिंता जाहिर की है। WHO के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। स्थिति को समझने के लिए नीचे दिए गए आंकड़ों को देखा जा सकता है:
| विवरण | महत्वपूर्ण आंकड़े |
|---|---|
| निशाना बनाए गए कुल अस्पताल | 9 |
| बंद होने वाले अस्पताल | 5 |
| मृतक मेडिकल स्टाफ (2 मार्च से) | 51 |
| कुल दर्ज स्वास्थ्य हमले (WHO) | 64 |
| विस्थापित लोगों की संख्या | 10 लाख से अधिक |
इजरायल और लेबनान के बीच आरोपों का दौर
इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया है कि हिजबुल्लाह एम्बुलेंस और मेडिकल सुविधाओं का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए कर रहा है। इजरायल ने चेतावनी दी है कि अगर यह नहीं रुका तो वे इन ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखेंगे। दूसरी तरफ, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि इजरायल बिना किसी सबूत के अस्पतालों पर हमले कर रहा है, जो कि युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) ने भी इसे स्वास्थ्य तबाही करार दिया है।
