लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन पर तैनात इंडोनेशिया के तीन वीर जवानों के शव 4 अप्रैल 2026 को अपने वतन वापस पहुंचे। जकार्ता के सोएकरनो-हट्टा हवाई अड्डे पर ताबूतों के पहुंचते ही माहौल काफी गमगीन हो गया। इन सैनिकों के ताबूतों को इंडोनेशिया के राष्ट्रीय झंडे में लपेटकर लाया गया था, जहां राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने खुद मौजूद रहकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सैन्य सम्मान के साथ इन जवानों को उनके अंतिम सफर पर रवाना किया गया और एयरपोर्ट पर मौजूद अधिकारियों और परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं।

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कैसे हुई यह दुखद घटना और कौन थे वे शहीद जवान

लेबनान में शांति बनाए रखने की कोशिश में जुटे इंडोनेशियाई जवानों पर पिछले कुछ दिनों में हमले हुए थे। दक्षिणी लेबनान के अलग-अलग इलाकों में हुए विस्फोटों में इन सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। शहीद हुए जवानों की जानकारी इस प्रकार है:

नाम और रैंक शहीद होने की तारीख घटना स्थल
मेजर जुलमी आदित्य इस्कंदर 30 मार्च 2026 बनी हयान (विस्फोट)
चीफ सार्जेंट मुहम्मद नूर इचवान 30 मार्च 2026 बनी हयान (विस्फोट)
सेकेंड कॉर्पोरल फारिजल रोमैडन 29 मार्च 2026 अदचित अल-कुसैर (विस्फोट)

इन बहादुर जवानों को उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत पदोन्नति दी गई है। उनके शवों को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांवों बांडुंग और योग्याकार्ता भेजा गया है।

सैनिकों की सुरक्षा के लिए इंडोनेशिया का कड़ा रुख

इन घटनाओं के बाद इंडोनेशियाई सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई है और संयुक्त राष्ट्र से इस मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि शांति सैनिकों पर बार-बार होने वाले हमले स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ताजा स्थिति को देखते हुए सेना प्रमुख जनरल अगस सुबियांतो ने लेबनान में तैनात बाकी सभी इंडोनेशियाई सैनिकों को बंकरों में रहने और बाहरी गतिविधियों से बचने का आदेश दिया है।

  • इंडोनेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से शांति मिशन की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है।
  • 3 अप्रैल को हुए एक और विस्फोट में तीन अन्य इंडोनेशियाई जवान घायल हुए हैं।
  • भारत और फ्रांस ने भी शांति सैनिकों पर हुए इन हमलों की निंदा की है और सुरक्षा की गारंटी मांगी है।
  • शांति सैनिकों पर जानबूझकर किया गया हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।