लेबनान और इसराइल के बीच शांति का समझौता हुआ था, लेकिन वह टिक नहीं पाया। 19 जून को सीजफायर होने के बावजूद 20 जून की सुबह इसराइल ने फिर से हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों की वजह से लेबनान के दक्षिणी इलाकों में एक बार फिर डर और तनाव का माहौल बन गया है।
क्या था पूरा मामला
अमेरिका, कतर और ईरान की मध्यस्थता से 19 जून 2026 को दोपहर 4 बजे एक समझौता हुआ था ताकि इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई रुक सके। लेकिन शनिवार 20 जून की आधी रात के बाद इसराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में एक दर्जन से ज़्यादा जगहों पर हमले किए।
इन हमलों में कुल 5 लोगों की जान चली गई। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अरब सलीम में 3 लोग, देइर ज़हरानी में 1 और द्वेइर में एक शख्स की मौत हुई। द्वेइर में एक शख्स को ड्रोन हमले ने निशाना बनाया था जब वह मोटरसाइकिल पर था।
बड़े नेताओं के बयान
- लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इन हमलों का विरोध किया और इसे एक खतरनाक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे शांति की कोशिशें नाकाम हो रही हैं।
- इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अगर हिजबुल्लाह ने हमले किए तो उन्हें भारी कीमत चुकानी होगी और इसराइल सीमा पर अपना सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा।
- ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि अगर समझौते का उल्लंघन हुआ तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
इस घटना से पहले 19 जून को हालात काफी गंभीर थे। उस दिन इसराइल के हमलों में 47 लेबनानी लोग मारे गए थे, जबकि इसराइल ने अपने 4 सैनिकों के मारे जाने की बात कही थी। सीजफायर से पहले इसराइल ने लेबनान में 150 से ज़्यादा हमले किए थे।