दक्षिण लेबनान के मजलद ज़ून इलाके में एक बहुत दुखद घटना हुई है। यहाँ इसराइल के हमलों में 5 लोगों की जान चली गई। इनमें से तीन लोग वो बहादुर बचाव कर्मी थे जो दूसरों की जान बचाने के लिए मौके पर पहुँचे थे। इस हमले के बाद लेबनान सरकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी गुस्सा है।

ℹ️: ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद, लाखों नौकरियां गईं और खाने-पीने की चीज़ें हुई महंगी, दुनिया भर में मचा हड़कंप

मजलद ज़ून हमले में कौन-कौन हुआ शिकार?

28 अप्रैल 2026 को हुए इस हमले में कुल 5 लोगों की मौत हुई। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मरने वालों में 3 सिविल डिफेंस के बचाव कर्मी, एक बुलडोजर ड्राइवर और एक अन्य नागरिक शामिल थे। इस घटना में लेबनानी सेना के 2 जवान भी घायल हुए जब वे बचाव कार्य में जुटे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक ‘डबल-टैप स्ट्राइक’ थी, जिसका मतलब है कि पहले हमला हुआ और जब मदद के लिए लोग पहुँचे, तब दोबारा हमला किया गया।

लेबनान के बड़े नेताओं ने इस हमले पर क्या कहा?

  • प्रधानमंत्री नवाफ सलाम: उन्होंने इस हमले को एक ‘स्पष्ट युद्ध अपराध’ बताया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात कही।
  • राष्ट्रपति जोसेफ औन: उन्होंने कहा कि बचाव कर्मियों को निशाना बनाना इसराइल की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
  • गृह मंत्री अहमद हज्जार: उन्होंने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बचाव कर्मियों पर हमला करना मानवीय मानकों के खिलाफ है।

लेबनानी सेना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या रही?

लेबनानी सेना ने जानकारी दी कि उनके सैनिकों पर तब हमला हुआ जब वे सिविल डिफेंस और नागरिकों की मदद कर रहे थे। वहीं, UN में लेबनान के दूत अहमद अराफा ने सुरक्षा परिषद को बताया कि लेबनान अपनी ज़मीन का कोई हिस्सा इसराइल को नहीं देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसराइल शांति के प्रयासों को खराब कर रहा है। इस बीच, फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने मानवीय मदद पहुँचाने के लिए UNIFIL की भूमिका बढ़ाने की बात कही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मजलद ज़ून हमले में कितने लोग मारे गए?

इस हमले में कुल 5 लोगों की मौत हुई, जिनमें 3 सिविल डिफेंस के बचाव कर्मी, एक बुलडोजर ड्राइवर और एक नागरिक शामिल थे।

लेबनान के प्रधानमंत्री ने इस हमले को क्या बताया?

प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इस हमले को एक ‘युद्ध अपराध’ और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन बताया है।