लेबनान और इसराइल के बीच चल रहे तनाव को रोकने के लिए अमेरिका की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ युद्धविराम समझौता अब काफी करीब है, लेकिन हिजबुल्लाह ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है। हिजबुल्लाह ने इस समझौते को हमले के बीच घुटने टेकना बताया है, जिससे जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी बरकरार है।

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युद्धविराम समझौते में क्या शर्तें रखी गई हैं?

अमेरिका की अगुवाई में वाशिंगटन में हुई बातचीत के बाद इसराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनाने की कोशिश की गई थी। इस समझौते के तहत प्रमुख शर्तें इस प्रकार तय की गई हैं:

  • हिजबुल्लाह को दक्षिण लितानी क्षेत्र से अपने सभी लड़ाकों और हथियारों को पूरी तरह हटाना होगा।
  • लेबनान की आधिकारिक सेना इस इलाके में अपना नियंत्रण स्थापित करेगी और वहां किसी अन्य संगठन का दखल नहीं होगा।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समझौते को लागू कराने के लिए सीधे गारंटर की भूमिका निभाएंगे।
  • लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इसे शांति स्थापित करने का आखिरी मौका बताया था।

हिजबुल्लाह ने समझौते को क्यों बताया अपमानजनक?

हिजबुल्लाह के महासचिव नईम कासिम ने इस समझौते की शर्तों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह सौदा अपमानजनक है। जब तक इसराइल दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान चला रहा है, तब तक हिजबुल्लाह के पीछे हटने की मांग करना दुश्मन के मंसूबों को पूरा करने जैसा है। ईरान ने भी हिजबुल्लाह का समर्थन करते हुए कहा है कि शांति के लिए इसराइली सेना का लेबनान से पूरी तरह बाहर जाना जरूरी है।

इस समझौते की बातचीत के बीच भी दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमले जारी रहे। इन हमलों में कई लोगों की जान गई और मारजायून के पास गोलाबारी में संयुक्त राष्ट्र के एक शांतिदूत की भी मौत हो गई। इसराइल के रक्षा मंत्री ने भी साफ किया है कि वे दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेंगे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

लेबनान और इसराइल के बीच युद्धविराम समझौता किसने तैयार कराया है?

यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार हुआ है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसके क्रियान्वयन के सीधे गारंटर के रूप में काम करेंगे।

हिजबुल्लाह ने इस समझौते को मानने से क्यों इनकार किया है?

हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम का कहना है कि जब तक इसराइल के हमले जारी हैं, तब तक पीछे हटने की मांग करना घुटने टेकने जैसा है, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे।