लेबनान और इसराइल के बीच जारी खूनी जंग को रोकने के लिए अब ईरान अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रहा है। खबर है कि ईरान के भारी दबाव की वजह से लेबनान में जल्द ही सीजफायर हो सकता है। हालांकि, इसराइल ने अभी तक अमेरिका की अस्थायी युद्धविराम की मांग को मानने से इनकार कर दिया है और हमले जारी रखे हुए हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच क्या चल रही है बातचीत?

ईरान इस समय अमेरिका पर काफी दबाव बना रहा है ताकि लेबनान को किसी भी सीजफायर समझौते का हिस्सा बनाया जाए। हिजबुल्लाह नेता इब्राहिम अल-मौसावी ने बताया कि ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी करने की धमकी दी है, जिसे वह एक आर्थिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ईरान के साथ बातचीत का दूसरा दौर हो सकता है।

इसराइल और हिजबुल्लाह का क्या है स्टैंड?

जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं और दोनों तरफ से हमले जारी हैं। इसराइल ने अमेरिका की टेम्परेरी सीजफायर की मांग को ठुकरा दिया है और खबर है कि वह दक्षिण लेबनान में अपनी सेना की मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह नेता नईम कासिम ने लेबनान सरकार को इसराइल के साथ किसी भी सीधी बातचीत से पीछे हटने की सलाह दी है, क्योंकि उनका मानना है कि यह केवल दबाव बनाने की एक चाल है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या होगा असर?

इस युद्ध का असर अब ग्लोबल मार्केट और आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। IMF ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के साथ तनाव बढ़ा, तो दुनिया मंदी की चपेट में आ सकती है। मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका की आर्थिक ग्रोथ घटकर 1.1 प्रतिशत रह सकती है। मानवीय संकट की बात करें तो संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लेबनान की करीब 20 प्रतिशत आबादी इस युद्ध की वजह से अपने घर छोड़कर विस्थापित हो चुकी है।