Lebanon Crisis: लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग घर छोड़ने को मजबूर, इजराइल के एक्शन पर UN और ICJ ने उठाए सवाल

लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच इजराइल द्वारा जारी किए गए सामूहिक विस्थापन के आदेशों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि नागरिकों को बड़े पैमाने पर इलाका खाली करने के लिए मजबूर करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। अब तक लेबनान की लगभग 20 प्रतिशत आबादी यानी 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून और विस्थापन पर विशेषज्ञों की राय

Human Rights Watch की वरिष्ठ शोधकर्ता Nadia Hardman के अनुसार इजराइल की यह रणनीति सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का जोखिम उठाती है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध के दौरान किसी भी पक्ष द्वारा नागरिकों का जबरन विस्थापन प्रतिबंधित है। जिनेवा कन्वेंशन का अनुच्छेद 49 स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी संरक्षित व्यक्ति का जबरन ट्रांसफर या निर्वासन नहीं किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने भी कहा है कि इजराइल के व्यापक विस्थापन आदेशों का पालन करना आबादी के लिए बहुत कठिन है।

लेबनान में विस्थापन और सैन्य कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम

तारीख मुख्य अपडेट
2 मार्च 2026 IDF ने दक्षिणी लेबनान के नागरिकों को तुरंत इलाका खाली करने का आदेश दिया।
6 मार्च 2026 UN ने कहा कि यह विस्थापन निषिद्ध जबरन विस्थापन की श्रेणी में आ सकता है।
12 मार्च 2026 लेबनान के लगभग 14 प्रतिशत हिस्से को विस्थापन आदेशों के दायरे में लाया गया।
19 मार्च 2026 रिपोर्ट्स के मुताबिक संघर्ष के पहले दो हफ्तों में ही 10 लाख लोग घर छोड़ चुके थे।
20 मार्च 2026 International Commission of Jurists ने इजराइल के आदेशों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया।

विस्थापन के इन आदेशों के कारण लेबनान के दक्षिणी हिस्सों और बेरुत के उपनगरों में रहने वाले लोग अपने रिश्तेदारों के यहां या समुद्र किनारे बने अस्थायी कैंपों में शरण ले रहे हैं। इजराइली सेना ने एम्बुलेंस और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है।