दक्षिणी लेबनान पर इसराइल का हमला, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन.

Aanya15 August 20262 min read71 viewsWorld
दक्षिणी लेबनान पर इसराइल का हमला, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन.

दक्षिणी लेबनान में इसराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और इस बीच लेबनान के प्रधानमंत्री ने कड़ी आपत्ति जताई है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दक्षिणी लेबनान के इलाकों में घरों, बुनियादी ढांचे और अन्य नागरिक संपत्तियों के कथित व्यवस्थित विनाश की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का एक बहुत गंभीर उल्लंघन बताया है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लेबनान सरकार का कड़ा रुख

प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमले, सैन्य घुसपैठ, मकानों को गिराना और घरों, बुनियादी ढांचे, सरकारी इमारतों तथा धार्मिक स्थलों का कथित व्यवस्थित विनाश अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है। उन्होंने उन तमाम दावों पर भी खुलकर सवाल उठाया है जिनमें इन गांवों और कस्بों को पूरी तरह सैन्य प्रतिष्ठान बताया जा रहा है। सलाम के मुताबिक, किसी भी इलाके को सैन्य क्षेत्र बता देना वहां के घरों को पूरी तरह नष्ट करने, आम लोगों को उनके घरों से विस्थापित करने और उन्हें वापस लौटने से रोकने का कोई सही औचित्य नहीं हो सकता है।

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इसराइल का पक्ष और रक्षा मंत्री का दौरा

दूसरी तरफ, इसराइल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने हाल ही में दक्षिणी लेबनान का दौरा किया और वहां अपनी सेना की मौजूदगी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि इसराइली सेना कथित सुरक्षा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी पूरी तरह बनाए रखेगी। काट्ज ने यह भी दावा किया कि इसराइली रक्षा बल यानी आईडीएफ इस इलाके में भूमिगत ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने की कार्रवाई कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिणी लेबनान में कई घरों को ध्वस्त किए जाने की बात भी स्वीकार की है।

हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों को खत्म करने का दावा

इसराइल का लगातार यह कहना है कि दक्षिणी लेबनान में की जा रही उनकी सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा खतरों और हिज्बुल्लाह से जुड़े सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना है। इसराइल का मानना है कि इन कार्रवाइयों से देश की सुरक्षा मजबूत होती है। वहीं दूसरी तरफ, लेबनान सरकार का यह स्पष्ट आरोप है कि इन सैन्य कार्रवाइयों की वजह से वहां की आम नागरिक आबादी और जरूरी बुनियादी ढांचे पर बहुत ही गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे आम जनता का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस पूरे मामले को लेकर बेरूत और तेल अवीव दोनों ही जगहों पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

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