लेबनान में इसराइल के बढ़ते हमलों ने शांति की सारी उम्मीदों को हिलाकर रख दिया है। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने साफ कहा है कि इन हमलों की वजह से युद्ध रोकने और ceasefire लागू करने की कोशिशें अब रुक गई हैं। यह सब उस समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौता हुआ था।

US-Iran समझौते पर असर

18 जून 2026 को US और Iran के बीच एक समझौता (MOU) हुआ था। इस समझौते में तय किया गया था कि सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद होगी और 60 दिनों का ceasefire लागू होगा। राष्ट्रपति Aoun ने पहले इस समझौते का स्वागत किया था, लेकिन 19 जून को हुए हमलों के बाद उन्होंने इसे एक खतरनाक मोड़ बताया है।

भारी नुकसान और मौतें

हिंसा इतनी बढ़ गई कि 19 जून को लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कम से कम 47 लोग मारे गए और 97 घायल हुए। इसराइल ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जिससे कई लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए। वहीं, दक्षिण लेबनान में एक टैंक पर हुए हमले में 4 इसराइली सैनिक भी मारे गए।

नेतनयाहू और अमेरिका का रुख

इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि उनका देश US-Iran समझौते से बंधा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि वे Hezbollah से भारी कीमत वसूलेंगे और दक्षिण लेबनान में तब तक सुरक्षा जोन बनाए रखेंगे जब तक जरूरी हो। दूसरी ओर, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इसराइली अधिकारियों की आलोचना की और Netanyahu से लेबनान में संयम बरतने को कहा।

बातचीत में देरी और नया ceasefire

लड़ाई के कारण स्विट्जरलैंड में होने वाली US और Iran की तकनीकी बातचीत को टाल दिया गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, भारी तनाव के बाद अमेरिका, ईरान और कतर की मदद से शुक्रवार 19 जून को एक नया ceasefire तय हुआ है। राष्ट्रपति Aoun ने स्पष्ट किया कि इसराइल के साथ लेबनान की सीधी बातचीत US-Iran डील से अलग है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.