लेबनान में इसराइल के साथ बातचीत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यहाँ के संसद स्पीकर नबीह बेरी ने सीधी बातचीत करने से इनकार कर दिया है। उनका मानना है कि जब तक युद्ध जारी है, तब तक टेबल पर बैठना बेकार है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इस बातचीत के लिए तैयार दिख रहे हैं, जिससे देश के अंदर मतभेद बढ़ गए हैं।
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लेबनान के नेताओं के बीच क्यों है मतभेद?
संसद स्पीकर नबीह बेरी का कहना है कि जब तक गोलियां चल रही हैं, तब तक इसराइल से सीधी बात करने का कोई फायदा नहीं है। बेरी हिज़्बुल्लाह के करीबी सहयोगी हैं और उनका मानना है कि बिना ठोस युद्धविराम (ceasefire) के बातचीत करना उत्पादक नहीं होगा। वे पूर्ण शांति समझौते के बजाय केवल ‘नॉन-अग्रेसन पैक्ट’ यानी एक-दूसरे पर हमला न करने के समझौते के पक्ष में हैं।
दूसरी तरफ, राष्ट्रपति Joseph Aoun और प्रधानमंत्री Nawaf Salam की सोच अलग है। राष्ट्रपति आउन वॉशिंगटन में आमने-सामने की बातचीत का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि युद्ध खत्म करने के लिए वे इसराइल के साथ संबंध सामान्य करने को तैयार हैं। प्रधानमंत्री सलाम ने भी साफ किया है कि बेरुत किसी भी जगह या तरीके से बातचीत के लिए तैयार है।
अमेरिका और सऊदी अरब की इसमें क्या भूमिका है?
इस मामले में बाहरी देशों का दबाव काफी ज्यादा है। अमेरिका के राजदूत Michel Issa ने राष्ट्रपति आउन और प्रधानमंत्री सलाम से मुलाकात की है। अमेरिकी दूतावास ने इसे एक ऐतिहासिक मौका बताया है जिससे लेबनान अपनी संप्रभुता और सीमा सुरक्षा पक्की कर सकता है। अमेरिका चाहता है कि राष्ट्रपति आउन और इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच मुलाकात हो, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुविधाजनक बना सकते हैं।
सऊदी अरब भी इस विवाद को सुलझाने में लगा है। सऊदी envoy प्रिंस याजिद बिन फरहान ने बेरुत का दौरा किया ताकि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्पीकर बेरी को एक साझा स्टैंड पर लाया जा सके। हालांकि, नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों की वजह से सऊदी की मध्यस्थता में मुश्किलें आ रही हैं। फिलहाल दक्षिण लेबनान में तनाव बना हुआ है और दोनों तरफ से हमले जारी हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नबीह बेरी इसराइल से सीधी बातचीत का विरोध क्यों कर रहे हैं?
नबीह बेरी का मानना है कि युद्ध के माहौल में बातचीत का कोई मतलब नहीं है। वे चाहते हैं कि पहले एक पक्का युद्धविराम हो और वे केवल एक नॉन-अग्रेसन पैक्ट के पक्ष में हैं।
अमेरिका लेबनान सरकार से क्या चाहता है?
अमेरिका चाहता है कि लेबनान के राष्ट्रपति और इसराइल के पीएम नेतन्याहू के बीच सीधी मुलाकात हो। अमेरिका का दावा है कि इससे इसराइली सेना की वापसी और बॉर्डर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।